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Hanuman Jayanti 2021: यूपी के इन हनुमान मंदिरों की अनोखी है मान्यता, जरूर करें यहां के दर्शन [Source: Patrika : India’s Leading Hindi News Portal]

लखनऊ. Hanuman Jayanti 2021. आज 27 अप्रैल कै हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) है। प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर हनुमान जयंती मनाई जाती है। बजरंगबली जल्द प्रसन्न होने वाले देवता माने जाते हैं। आज के दिन बजरंगबली के दर्शन से साढ़ेसाती का प्रकोप दूर होता है और मंगल ग्रह भी शांत होता है। हनुमान जयंती के अवसर पर प्रदेश के अलग-अलग मंदिरों में तैयारी की जाती है। काशी का संकट मोचन मंदिर हो या फिर प्रयागराज का लेटे हनुमानजी का मंदिर, हर स्‍थान पर बजरंगबली को तुलसी का भोग लगाया जाता है और माना चढ़ाई जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से हर संकट से मुक्ति मिलती है और घर में खुशहाली का वास होता है। लेकिन इस बार कोरोना के ग्रहण से तैयारियों ने अलग रूप ले लिया है। मंदिरों के कपाट बंद हैं। मंदिरों के कपाट बंद हैं। जहां आज के दिन खुले भी हैं, वहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए भक्तों को संकटमोचन हनुमान के दर्शन कराए जाएंगे। बहरहाल, आज हम आपको प्रदेश के कुछ ऐसे हनुमान मंदिरों के बार में बता रहे हैं, जहां हर साल भक्तों की भीड़ होती है और जहां हर मनोकामना के पूरी होने की मान्यता है।

हनुमान गढ़ी

यूपी में बजरंगबली के अनेकों ऐसे मंदिर हैं जहां हर साल भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है। भगवान राम की नगरी कही जाने वाली अयोध्या में हनुमान जी का विशाल मंदिर है जिसे हनुमान गढ़ी के नाम से जाना जाता है। यह यूपी का बेहद प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर राजद्वार के सामने ऊंचे टीले पर स्थित है। इस मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करने के लिए 60 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। ऐसी मान्यता है, कि भगवान हनुमान अपने प्रभु भगवान श्रीराम के साथ यहां रहते थे। मंदिर के बगल में सुग्रीव टीला और अंगद टीला मौजूद हैं।

संकट मोचन मंदिर

विश्व विख्यात संकट मोचन मंदिर में हर साल हनुमान जयंती पर भक्तों की भीड़ लगी होती है। मंदिर के प्रांगढ़ में भगवान हनुमान की दिव्य प्रतिमा है। ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी की यह मूर्ति गोस्वामी तुलसीदासजी के तप एवं पुण्य से प्रकट हुई स्वयंभू मूर्ति है। हर मंगलवार और शनिवार को हजारों की तादाद में लोग हनुमान जी की पूजा अर्चना करने के लिए यहां पहुंचते हैं। लेकिन इस वर्ष कोरोना की दूसरी लहर ने इस पर ग्रहण लगा दिया है। संकट मोचन मंदिर में हर साल हनुमान जयंती के अवसर पर संगीत समारोह का आयोजन होता है। आयोजित होने वाला यह आयोजन शास्त्रीय संगीत प्रेमियों के लिए एक उत्सव जैसा होता है। कोविड-19 के चलते देशभर में लगे लॉकडाउन के कारण पिछले वर्ष इसका आयोजन 12 से 17 अप्रैल तक डिजिटल प्लेटफार्म पर किया गया था। मगर इस बार स्थिति पहले से गंभीर है, जिस कारण इस तरह का कोई भी आयोजन नहीं किया जा रहा है।

प्रयागराज का हनुमान मंदिर

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में स्थित यह मंदिर बेहद प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति लेटी हुई मुद्रा में है। 20 फुट लंबे भगवान हनुमान की यह प्रतिमा पूरे मंदिर में आकर्षण का केंद्र है। हर साल यहां गंगा स्नान करने के बाद श्रद्धालु हनुमान के दर्शन जरूर करते हैं। पूरी दुनिया में यह अनूठा मंदिर है जहां बजरंगबली की लेटी हुई प्रतिमा की पूजा की जाती है। जब बारिश में बाढ़ आती है तो पूरा मंदिर जलमग्न हो जाता है। प्रयागराज का यह मंदिर श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। मंदिर को लेकर मान्यता है कि संगम का पूरा पुण्य यहां पर हनुमान जी के दर्शन के बाद ही पूरा होता है। कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत इस बार कम भीड़ में पूजा अर्चना पूरी की जाएगी। श्रद्धालुओं को वर्चुअल माध्यम से बजरंगबली के दर्शन कराए जाएंगे।

हनुमान धारा मंदिर

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के पर्वत पर स्थित भगवान हनुमान का बेहद खूबसूरत मंदिर है। चित्रकूट पर्वतमाला पर स्थित इस मंदिर के ठीक बगल से हमेशा पानी का धारा निकलती है। इस वजह से मंदिर का नाम हनुमान धारा के नाम से पड़ गया। मंदिर के बारे में कहा जाता है की जब हनुमान जी ने लंका में आग लगाई थी, तो उसके बाद उनकी पूंछ में लगी आग को बुझाने के लिए वह इस जगह पर आए थे। मंदिर मे हनुमान जी की विशाल मूर्ति के पास दो जल कुंड हैं। मान्यता है कि यहां हर मनोकामना पूरी होती है। हनुमान जयंती पर सुबह से ही इस मंदिर में भक्तों की लंबी कतार लगती है।

महावीर मंदिर

यूपी के प्रसिद्ध मंदिरों में गिने जाने वाले पटना के महावीर मंदिर में बजरंगबली की युग्म मूर्तियों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। मंदिर को लेकर एक अनोखी परंपरा है। मंदिर के समीप बनी बेउर जेल के कैदियों द्वारा तोड़ी गई तुलसी पत्र से महावीर को भोग लगता है। जेल परिसर में कैदी ही तुलसी की खेती करते हैं। जेल से आठ किग्रा तुलसी पत्र मंदिर में आता है, जिसका उपयोग पूजन और भगवान को प्रसाद चढ़ाने में होता है। हर दिन बेउर जेल से होमगार्ड के जवान शाम को पांच बजे तुलसी पत्र लेकर आते हैं। इसके बदले मंदिर से कैदियों को प्रसाद भेजा जाता है। माना जाता है कि इस पुनीत कार्य से कैदियों का प्रायश्चित होता है।

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