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3 माह से रोजाना टेस्ट नहीं बढ़े, बल्कि बड़े राज्यों में घट चुके हैं [Source: Dainik Bhaskar]



देश में साढ़े तीन महीने से रोज होने वाले कोरोना टेस्ट नहीं बढ़े हैं। सितंबर की शुरुआत में ही रोज 10 लाख से ज्यादा टेस्ट होने लगे थे। जबकि, 20 नवंबर को रोजाना औसत 10 लाख से कम हो गया यानी, टेस्ट बढ़ने के बजाए लगभग स्थिर हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि सबसे ज्यादा मरीजों वाले राज्य महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, केरल और उत्तर प्रदेश में तो टेस्ट अब घट रहे हैं।

दिल्ली में तीन महीने पहले भी रोज औसतन 62 हजार टेस्ट हो रहे थे, अब भी इतने ही हो रहे हैं। वो भी तब, जब दिल्ली के लोग कोरोना की तीसरी लहर का सामना कर रहे हैं। देश की 20% रोजाना मौतें भी अब दिल्ली में ही हो रही हैं। इन छह राज्यों में कुल 50.90 लाख मरीज हैं, जो देश के कुल मरीजों के 55% हैं।

देश में अब तक कुल 13.48 करोड़ टेस्ट हो चुके हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा 18.44 करोड़ टेस्ट अमेरिका में हुए हैं। आबादी के हिसाब से देखें तो अमेरिका की 55% आबादी के टेस्ट हो चुके हैं, जबकि भारत में अभी यह दर सिर्फ 9.7% है।

कोरोना पतली तरल परतों से चिपककर सतह पर जीवित बना रहता है: शोध कोरोना वायरस पतली तरल परतों से चिपककर सतह पर जीवित बना रहता है। यह जानकारी आईआईटी-बॉम्बे के एक शोध में सामने आई है। रिसर्चर्स के अनुसार शोध से पता चला है कि यह घातक विषाणु ठोस सतहों पर कई घंटे और कई दिन तक कैसे अस्तित्व में बना रहता है। रिपोर्ट पत्रिका ‘फिजिक्स ऑफ फ्लूइड्स’ में प्रकाशित हुई है।

केंद्र की नई गाइडलाइन: समारोहों में 200 से ज्यादा लोग नहीं जुट सकते, राज्य चाहें तो संख्या 100 से भी कम कर सकते हैं

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को नए दिशा-निर्देश जारी किए। ये 1 से 31 दिसंबर तक लागू रहेंगे। नई गाइडलाइन के मुताबिक कंटेनमेंट जोन में एहतियातों के पालन कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासकों की होगी। कंटेनमेंट जोन की सूची को जिला कलेक्टर रोज अपडेट कराएंगे।

गाइडलाइन की प्रमुख बातें

  • सिनेमा हॉल अब भी 50% दर्शक क्षमता के साथ चलेंगे।
  • स्विमिंग पूल में सिर्फ खिलाड़ियों की ट्रेनिंग हो सकेगी।
  • धार्मिक, सामाजिक आदि आयोजनों में 200 से ज्यादा लोग नहीं जुट सकते। राज्य संख्या को 100 से भी कम कर सकते हैं।

एक सलाह भी: जिन शहरों-इलाकों में टेस्ट पॉजिटिविटी रेट (संक्रमण की दर) 10% से ऊपर है, वहां दफ्तरों, फैक्ट्रियों, दुकानों आदि में कर्मचारियों की शिफ्ट अलग-अलग करनी चाहिए।

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फाइल फोटो

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