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2014 में नियुक्ति घोटाला करने के बाद पार्टी तक से पदमुक्त मेवालाल मंत्री, कोरोना में पास बनवा बेटी को लाने वाले जीवेश भी [Source: Dainik Bhaskar]



कोरोना पीक पर था और लोग इसके लिए परेशान थे कि कैसे अपने बच्चों को कोटा से बिहार लाया जाए। पास बनना मुश्किल था लेकिन पास बनवाकर भाजपा विधायक जीवेश कुमार ने अपनी बेटी को कोटा से वापस दरभंगा लेते आए। आने के बाद वे 14 दिनों के लिए कोरेंटाइन भी नहीं हुए थे। अब वहीं जीवेश कुमार बिहार के श्रम संसाधन मंत्री बनाए गए हैं। उन्हें पर्यटन का भार भी मिला है। वहीं, शिक्षा मंत्री मेवालाल पर सबौर कृषि विश्वविद्यालय में नियुक्ति को लेकर घोटाले का आरोप है। इसके अलावा विजिलेंस में भी मामला दर्ज है।

जिला प्रशासन पर संरक्षण देने का आरोप
उस समय भाकपा-माले ने भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा पर आरोप लगाया था कि सरकार दोहरी नीति अपना रही है। आरोप यह भी कि वे दिल्ली से सीधे दरभंगा आ गए हैं और क्षेत्र में भी घूम रहे हैं लेकिन उन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिला प्रशासन भी विधायक मिश्रा को संरक्षण दे रही है। अगर गरीब जनता कोई दिल्ली-पंजाब से आता है तो उन्हें रास्ते में पुलिस प्रताड़ित भी करती है और घर जाने के बाद 14 दिन आइसोलेट में रहना पड़ता है।

पूर्व विधायक ने दोहरी नीति का लगाया था आरोप
पूर्व विधायक ऋषि मिश्रा ने भी सरकार पर दोहरी नीति का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के नेता को आने और जाने का पास कैसे मिलता है? यह वाकया सोशल मीडिया पर खूब चर्चित हुआ था। जीवेश दूसरी बार लगातार निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने कांग्रेस के चर्चित उम्मीदवार उस्मानी को हराया। उस्मानी जिन्ना प्रकरण से विवादों में आए थे। इन्होंने 2011 के में वकालत भी पढ़ाई भी की थी। इससे पहले साइंस विषय में ग्रेजुएशन किया था।

शिक्षा मंत्री पर भी ऐसे बड़े आरोप

बिहार के शिक्षा मंत्री बनाए गए तारापुर के जदयू विधायक मेवालाल चौधरी पर शिक्षा के मंदिर में ही घोटाला करने का आरोप है। उन पर विजिलेंस में भी मामला दर्ज है। सबौर कृषि विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापकों व अन्य पदों की नियुक्ति में तत्कालीन कुलपति मेवालाल पर आरोप लगा था कि उन्होंने बिहार के 18 और दूसरे राज्यों के 87 को नौकरी दी थी। यानी 105 में से 18 ही बिहार मूल निवासी थे। तब 20 जुलाई 2014 को दैनिक भास्कर ने इसका खुलासा किया था। 2011 के जून महीने में बहाली के लिए विज्ञापन जारी हुआ था। मामले में खुलासा हुआ था कि विश्वविद्यालय को कई विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्रीधारी योग्य अभ्यर्थी या तो मिले नहीं या नियुक्ति को विवि ने अटका दिया। एसटी श्रेणी के 19 विषयों के 28 पदों के लिए विज्ञापन निकला था जिसमें सिर्फ हॉटीकल्चर, आलरीकल्चर, एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, जूलॉजी और एनिमल हसब्रेंडी के एक-एक पदों पर नियुक्ति हुई। शेष 15 विषयों में एक भी नियुक्ति नहीं की गई जबकि हॉटीकल्चर- ऑलरीकल्चर का भी एक पद खाली ही रह गया। सभी आरक्षित श्रेणी की नियुक्ति का लगभग ऐसा ही हाल हुआ था। आरक्षित वर्ग की कुल रिक्तियों 159 पदों के विरूद्ध सिर्फ 56 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति हुई थी। अनुसूचित जाति के 64 फीसदी, अनुसूचित जनजाति के 86 प्रतिशत और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के 80 फीसदी पद खाली रह गए थे। मेवालाल चौधरी पर आरोप के बावजूद जदयू ने उन्हें पिछली बार भी टिकट दिया था और वे तब भी जीती थे। उनकी पत्नी नीता चौधरी भी तारापुर से विधायक रह चुकी थी। पत्नी का निधन हो चुका है। इसको लेकर भी विवाद है।

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नीतीश कैबिनेट में शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी और श्रम संसाधन व पर्यटन मंत्री जीवेश कुमार मिश्रा।

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