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सिर्फ डिग्री हासिल करने से नहीं होते पूरी तरह शिक्षित- राष्ट्रपति [Source: Patrika : India’s Leading Hindi News Portal]

रांची: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि भ्रातृत्व भाव पूरे देश को जोड़ता है, हम सभी इंसान है, तो आचरण में अंतर नहीं आना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ डिग्री हासिल करने से पूरी तरह से शिक्षित नहीं होते हैं। शिक्षित वह व्यक्ति होता है जो अच्छा इंसान होता है। राष्ट्रपति शनिवार को झारखंड के गुमला जिले में विकास भारती बिशुनपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

राष्ट्रपति ने कहा कि वे आदिवासी समुदाय के लोगों से व्यक्तिगत तौर पर मिलना चाहते थे, ठेठ आदिवासी समुदाय के लोगों से मिलने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि देश बदल रहा है और हम सब को भी बदलना है। एक सबसे बड़ी बात यह है कि जब देश बदलता है संसाधनों की आवश्यकता होती है। हमारे पास संसाधन उतने नहीं हैं। जनसंख्या बढ़ती जा रही है।

उन्होंने जनजातीय समुदाय के लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि भले ही किसी के पास पास संसाधन कम और अधिक हैं लेकिन शिक्षा एक ऐसा संसाधन है , जिसे वे अपने बच्चों को अधिक से अधिक दे सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों को अवश्य पढ़ाएं और उन्हें अच्छा आचरण दें। उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसी शिक्षा दीजिए कि अच्छे—भले की उन्हें पहचान हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा का ध्येय छात्र को अच्छा इंसान बनाना होना चाहिए। अच्छा इंसान होगा और वो डॉक्टर बन गया तो अच्छा डॉक्टर होगा। अच्छा इंसान होगा और अगर वो नेता बन गया तो वो अच्छा सामाजिक नेता होगा। अच्छा इंसान होगा तो अच्छा पति और पिता भी होगा। बेटी अच्छी इंसान होगी तो अच्छी बहू और अच्छी सास भी होगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि कल वे सेंट्रल यूनिवर्सिटी झारखंड में गए, तो गांव से निकलते समय गांव के बच्चों, बूढ़ों, बहनों से प्रोटोकाल को तोड़ते हुए गाड़ी रोककर मिला। वे उन्हें देखने के लिए इंतजार कर रहे थे। जब उनसे मुलाकात हुई, तो उन्हें काफी खुशी हुई। उन्होंने बताया कि वे अर्जुन मुंडा और द्रौपदी मुर्मू को पहले से जानते है,लेकिन इनको जानने में और ठेठ आदिवासी समुदाय के लोगों को जानने में अंतर है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम है और इससे बेटियों का सशक्तीकरण हुआ है। राष्ट्रपति ने कहा कि ज्ञान से ही बुद्धि और कौशल को प्राप्त किया जा सकता है। नैतिकता को आत्मसात करना भी शिक्षा का काम होता है। उन्होंने कहा कि जिस भूमि पर वह आए हैं यहां के लोगों का जीवन सभी के लिए प्रेरणास्पद है अतः सभी को यहां से प्रेरणा अवश्य लेनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने विकास भारती बिशनपुर के सचिव पद्मश्री अशोक भगत के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि अशोक भगत संपन्न घर के हैं, लेकिन सेवा के लिए उन्होंने घर का त्याग कर दिया। बिशुनपुर त्याग, बलिदान, सम्मान और सेवा की भूमि है। इन लोगों को बेहतर शिक्षा से ज्ञान को बढ़ावा मिलना चाहिए, जिससे आदर्श नागरिक बनाया जा सके। सेवा के भाव के कारण अशोक भगत को पद्मश्री पुरस्कार मिला है। इससे पूर्व विकास भारती के सचिव अशोक भगत ने राष्ट्रपति का स्वागत किया और उन्हें समाज में प्रेरणा और उर्जा का स्रोत बताया। कार्यक्रम में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू और केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा भी उपस्थित थे।

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