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सरना धर्म काेड पर 30 तक फैसला नहीं तो 6 दिसंबर काे राष्ट्रव्यापी चक्का जाम [Source: Dainik Bhaskar]



रविवार को सरना धर्म कोड के लिए सरना धर्म रथ निकाला गया। मौके पर सिकंदर टुडू ने कहा कि आजाद भारत में आदिवासियों को अब तक उनका धार्मिक आजादी प्राप्त नहीं है। जबकि अनुच्छेद 25 के तहत यह मौलिक अधिकार का मामला है। इसके बगैर भारत के लगभग 15 करोड़ आदिवासियों का अस्तित्व, पहचान, हिस्सेदारी खतरे में खड़ा है। उनकी भाषा संस्कृति, प्रकृतिपूर्ण जीवन दर्शन, सोच संस्कार, मान्यताओं पर हमला जारी है। कहा कि आदिवासी नैसर्गिक रूप से प्रकृति पूजक है, हिंदू, मुसलमान, ईसाई आदि नहीं है।

2021 की जनगणना में अभी नहीं तो कभी नहीं की तर्ज पर आदिवासी सेंगेल अभियान और अन्य अनेक आदिवासी संगठन केवल और केवल सरना धर्म कोड को जनगणना में शामिल कराने को कृत संकल्पित हैं। भटकाने वाली दूसरा कोई नाम स्वीकार नहीं है। आजादी के लिए लगभग 100 सरना धर्म रथ भारत के 5 प्रदेशों (झारखंड बंगाल बिहार उड़ीसा और असम) में जन जागरण हेतु दौरा करेंगे। तत्पश्चात यदि भारत सरकार 30 नवंबर तक इसका कोई सार्थक फैसला नहीं देती है तो सरना धर्म कोड के लिए 6 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी रेल-रोड चक्का जाम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जेएमएम पार्टी और उनकी अंधभक्ति में समर्पित असेका, मांझी परगना महाल जैसे अनेक संगठन और अंधभक्त अब तक आदिवासियों के अस्तित्व, पहचान, हिस्सेदारी को समृद्ध करने की जगह आदिवासियों को गुमराह करने का काम किया है। जो दुर्भाग्यपूर्ण है। हम इसका विरोध करते हैं और इसकी निंदा करते हैं। अन्यथा अबतक झारखंडी डोमिसाइल, संताली राजभाषा, सरना धर्म कोड, 5वीं अनुसूची, महान शहीदों सिदो मुर्मू-बिरसा मुंडा के वंशजों को सम्मान और असम अंडमान की झारखंडी आदिवासियों को एसटी का दर्जा प्राप्त हो जाता।

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