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सदर अस्पताल में दाे रुपए की डिब्बी नहीं, सीबीसी जांच बंद, 10 दिन में मरीजाें के खर्च हुए 1.20 लाख [Source: Dainik Bhaskar]



काेराेना संक्रमण की शुरुआत के बाद से आठ माह तक सामान्य मरीजाें के लिए सदर अस्पताल का पैथाेलाॅजी बंद रहा। दिसंबर से यह फिर शुरू हु्आ, लेकिन सवा महीने के बाद भी इसकी व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पाई है। पिछले दस दिनाें से यहां सीबीसी खून जांच बंद है। कारण यह है कि सैंपल लेने वाली डिब्बी ही नहीं है।

यह वायल दाे रुपए में आती है, लेकिन जिम्मेदाराें का इसपर ध्यान नहीं है। वह अपनी जिम्मेदारी अधीनस्थाें पर थाेप रहे हैं। कह रहे हैं-यह ताे छाेटा-माेटा काम है। नतीजा यह है कि जाे कंप्लीट ब्लड काउंट की जांच सदर अस्पताल में मुफ्त में हाे सकती है, इसके लिए मरीजाें काे प्राइवेट लैब में 300 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।

समय की बर्बादी अलग है। जांच के बाद जबतक मरीज रिपाेर्ट लेकर बाहर आते हैं, तब तक ओपीडी का समय खत्म हाे जाता है। डाॅक्टर उठ जाते हैं। इसलिए मरीजाें काे दूसरे दिन भी अस्पताल आना पड़ता है।

बड़ा सवाल गरीब मरीजाें की कमाई निजी केंद्रों पर हो रही खर्च, जिम्मेदार कौन?

ये है मरीजाें के खर्च का गणित

अस्पताल में हर दिन तीस से चालीस गर्भवती महिलाओं के अलावा अन्य मरीजाें काे सीबीसी यानी कंप्लीट ब्लड काउंट जांच की जरूरत पड़ती है। दस दिन में करीब 400 मरीज पैथाेलाॅजी से वापस चले गए। बाहर से जांच कराने में उन्हें 1 लाख 20 हजार रुपए खर्च हाे गए। सदर अस्पताल में जांच हाेती ताे उन्हें एक भी पैसे नहीं लगते।

अब जिम्मेदार एक दूसरे पर जिम्मेदारी थाेप रहे हैं। बरारी हाउसिंग बाेर्ड से अस्पताल आए 51 वर्षीय असीत कुमार ने सांस फूलने की शिकायत की डाॅक्टर ने उन्हें सीबीसी जांच की सलाह दी। लेकिन पैथाेलाॅजी में वाइल नहीं हाेने पर लाैटा दिया गया। फिर उन्हाेंने बाहर जाकर जांच कराई। वार्ड 29 की 48 वर्षीया मुन्नी दास काे सिर व गर्दन में दर्द के साथ सांस लेने में परेशानी है। उसे भी प्राइवेट पैथाेलाॅजी में जांच करानी पड़ी। अन्य मरीजाें की भी यही स्थिति है।

अब वायल हुआ खत्म

काेराेनाकाल में सदर अस्पताल में पैथाेलाॅजी जांच सामान्य मरीजाें के लिए बंद रही। दिसंबर में 2-4 दिन जांच के बाद सीबीसी जांच की मशीन खराब हाे गई। अब मशीन ठीक हुई ताे सैंपल लेने के लिए वायल ही नहीं है।

सीबीसी जांच क्यों

जेएलएनएमसीएच की स्त्री राेग विशेषज्ञ डाॅ. राेमा यादव के अनुसार सीबीसी में हीमाेग्लाेबीन, प्लेटलेट काउंट, आरबीसी और डब्ल्यूबीसी का पता चलता है। इसमें संक्रमण का भी पता चलता है।

जिम्मेदार जूनियर पर थाेप रहे जवाबदेही

सदर अस्पताल के प्रभारी डाॅ. एके मंडल ने बताया कि सीबीसी वाइल खत्म हाे गया है ताे टेक्नीशियन काे मंगवाना चाहिए। छाेटा-माेटा काम ताे वह खुद भी करवा सकते हैं। अब मुझे जानकारी मिली है ताे खरीदेंगे। सिविल सर्जन डाॅ. विजय कुमार सिंह ने कहा कि अस्पताल प्रभारी एके मंडल खुद पैथाेलाॅजिस्ट हैं। यह सब चीज उन्हें अपने स्तर से देखनी चाहिए। छाेटे-छाेटे सामानाें के लिए हम कितना कहेंगे। हालांकि अब वायल खरीदवाएंगे।

इधर, मायागंज में सैंपल लेने के बाद बदल गया पर्चा

मेडिकल काॅलेज अस्पताल के पैथाेलाॅजी में भी बुधवार काे लापरवाही सामने आयी। गाेपालपुर की 43 वर्षीया मीरा देवी ने पैथाेलाॅजी में खून का सैंपल दिया। लेकिन पैथाेलाॅजी के कर्मचारी ने उसे 40 वर्षीया हीरा देवी का पर्चा वापस कर दिया। बाहर निकलने पर जब परिजनाेें ने देखा कि पर्चा बदल गया ताे उसने काउंटर पर शिकायत की।

वहां नर्साें ने उसे आश्वासन दिया कि गलती से ऐसा हुआ है। जांच रिपाेर्ट आपके नाम से ही बनेगी। हीरा देवी के पर्चे में माेबाइल नंबर भी नहीं लिखा है, ताकि उसेसे संपर्क जाता। अधीक्षक डाॅ. अशाेक कुमार भगत ने बताया कि हीरा व मीरा नाम लगभग एक जैसा ही है। इसलिए नर्साें काे पर्चा वापस देने में चूक हाे गयी हाेगी।

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सदर अस्पताल में सीबीसी जांच कराने पहुंचीं महिला मरीज।

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