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लोगों के धैर्य की आक्सीजन खत्म हुई तो,भारी कीमत चुकानी होगी: विजय पाण्डेय [Source: Patrika : India’s Leading Hindi News Portal]

लखनऊ, कोरोना महामारी ने अचानक इतनी संख्या में लोगों को प्रभावित किया कि उनके लिए सरकार के पास सुविधा के नाम पर सिर्फ बयानबाजी ही बची रह गई है।अधिवक्ता विजय पाण्डेय ने आपबीती बयान करते हुए बताया कि सूबे के कई अस्पतालों, श्मशानघाटो और आक्सीजन प्लांटों में जाकर देखने पर मालूम होता है कि वास्तव में इस देश में व्यक्ति की उपेक्षा का आलम क्या है। हास्पिटल में कोई सुनने वाला नहीं है कोहराम मचा है।

श्मशान घाटों पर लाशों की अंतहीन कतार, सरकारी आंकड़ों को आईना दिखा रही है जितनी लाशें जल रही हैं उससे कई गुना इंतजार में है ।आक्सीजन के लिए मारामारी ने उसे कालाबाजारी में तब्दील कर दिया है। समाज में मानवता और दानवता दोनों एक साथ समानरूप से सक्रिय हैं 480 रु. की आक्सीजन किट पांच-छः हजार में मिल रही है, ऐसा नहीं है कि प्रशासन इनको रोंकना नहीं चाहता, लेकिन वह भी परेशान और मजबूर हैं क्योंकि लोग आपदा में अवसर का लाभ उठा रहे हैं।

विजय पाण्डेय ने कहा कि आपदा में संकट सभी पर है लेकिन जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे व्यक्ति और परिवार की सहायता के लिए निकलना ही पड़ता है, आँख बंद करके किसी को मरते हुए हम कैसे देख सकते हैं, इन्हीं संघर्षों में समाज के ऐसे अनुभव प्राप्त हो रहे हैं जिसे एक सभ्य समाज में मान्यता दे पाना मुश्किल है, लाश के वाहनों के नखरे तो बारात बारात के वाहनों को भी मात दे रहे हैं, जो गिनती मुंह से निकल जाए वही किराया है ऐसी विषम परिस्थिति में सर्वोत्तम और प्रभावी उपाय सिर्फ बगैर उम्र की रेखा खींचे पूरे देश को वैक्सीन लगाना, यदि ऐसा न किया तो बहुत बड़ी आबादी को जान से हाथ धोना पड़ेगा।

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