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लगातार 2 चुनाव हारे, तो राजनीति छोड़ना चाहते थे नीतीश; अटलजी के कहने पर पहली बार मुख्यमंत्री बने [Source: Dainik Bhaskar]



‘करना था इनकार, मगर इकरार कर बैठे…’ नीतीश कुमार पर ये गाना आज बिल्कुल सटीक बैठा है। न-न करते वो आखिरकार 7वीं बार मुख्यमंत्री बन गए। नीतीश को इस बार सीएम बनने से इनकार इसलिए था, क्योंकि उनकी पार्टी जदयू 43 सीट ही जीत सकी है। कभी छोटे भाई की भूमिका में रही भाजपा ने 74 सीटें जीती हैं। इकरार भी उन्होंने भाजपा के कहने पर ही किया है। रविवार को जब नीतीश कुमार को NDA का नेता चुना गया, तो उन्होंने बाहर आकर कहा, ‘मैं मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहता था। पर भाजपा नेताओं के आग्रह पर मैं एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ लूंगा।’

नीतीश कुमार ने 7 दिन के मुख्यमंत्री से लेकर 7वीं बार के मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया है। हालांकि, ये सफर उतना आसान नहीं था, जितना दिखता है। नीतीश कुमार के जीवन में एक वक्त ऐसा भी आया था, जब वो राजनीति छोड़कर ठेकेदारी में आने का मूड बना चुके थे। शुरुआत नीतीश के राजनीति में आने की कहानी से करते हैं।

26 साल की उम्र में पहला चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए

बात 1977 के विधानसभा चुनाव के वक्त की है। नालंदा जिले की हरनौत सीट से एक 26 साल का लड़का जनता पार्टी के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ रहा था। इस चुनाव में जनता पार्टी ने 214 सीटें जीतीं और 97 हारी। इन 97 हारी सीटों में हरनौत भी थी। इस सीट से हारने वाले 26 साल के उस युवा नेता का नाम था नीतीश कुमार। वही, नीतीश कुमार जो बाद में केंद्रीय मंत्री और फिर बिहार के मुख्यमंत्री बने।

नीतीश को पहले चुनाव में जिससे हार मिली थी, उनका नाम था भोला प्रसाद सिंह। भोला प्रसाद सिंह वही नेता थे, जिन्होंने चार साल पहले ही नीतीश और उनकी पत्नी को कार में बैठाकर घर तक छोड़ा था।

नीतीश पहली हार को भूलकर 1980 में दोबारा इसी सीट से खड़े हुए, लेकिन इस बार जनता पार्टी (सेक्युलर) के टिकट पर। इस चुनाव में भी नीतीश को हार मिली। वो निर्दलीय अरुण कुमार सिंह से हार गए। अरुण कुमार सिंह को भोला प्रसाद सिंह का समर्थन हासिल था।

इस हार के बाद नीतीश इतने निराश हो गए कि उन्होंने राजनीति छोड़ने का मूड बना लिया। इसकी एक वजह ये भी थी कि नीतीश को यूनिवर्सिटी छोड़े 7 साल हो गए थे और शादी हुए भी काफी समय हो चुका था। लेकिन, इन तमाम सालों में वो एक पैसा भी घर नहीं लाए थे। इन सबसे तंग आकर नीतीश राजनीति छोड़कर एक सरकारी ठेकेदार बनना चाहते थे। वो कहते थे ‘कुछ तो करें, ऐसे जीवन कैसे चलेगा?’ हालांकि, वो ऐसा नहीं कर पाए।

तीसरी बार में विधायक बन ही गए
लगातार दो चुनाव हारने के बाद नीतीश 1985 में तीसरी बार फिर हरनौत से खड़े हुए। लेकिन, इस बार लोकदल के उम्मीदवार के रूप में। इस चुनाव में नीतीश 21 हजार से ज्यादा वोटों से जीते। उन्होंने कांग्रेस के बृजनंदन प्रसाद सिंह को हराया। नीतीश ने आखिरी बार 1995 में विधानसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि, उन्होंने बाद में इस सीट से इस्तीफा दे दिया और 1996 के लोकसभा चुनाव में खड़े हुए।

पहले विधानसभा और फिर लोकसभा पहुंचे
1985 में पहली बार विधायक बनने के बाद नीतीश 1989 के लोकसभा चुनाव में बाढ़ से जीतकर लोकसभा पहुंचे। उसके बाद 1991 में लगातार दूसरी बार यहीं से लोकसभा चुनाव जीते। नीतीश 6 बार लोकसभा के सांसद रहे हैं। तीसरी बार 1996, चौथी बार 1998, 5वीं बार 1999 में लोकसभा चुनाव जीते।

नीतीश ने अपना आखिरी लोकसभा चुनाव 2004 में लड़ा। उस चुनाव में नीतीश बाढ़ और नालंदा दो जगहों से खड़े हुए थे। हालांकि, बाढ़ सीट से वो हार गए और नालंदा से जीत गए। ये नीतीश का आखिरी चुनाव भी था। इसके बाद से नीतीश ने कोई चुनाव नहीं लड़ा है।

अटलजी के कहने पर पहली बार सीएम बने, उन्हीं की तरह इस्तीफा भी दिया
बात 2000 के विधानसभा चुनाव की है। किसी एक पार्टी या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला था। तब नीतीश अटल सरकार में कृषि मंत्री थे। चुनाव के बाद अटलजी के कहने पर भाजपा के समर्थन से ही नीतीश ने पहली बार 3 मार्च 2000 को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, बहुमत नहीं होने के कारण उन्होंने 7 दिन में ही इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की तरह ही इस्तीफा देते हुए कहा कि वो जोड़-तोड़ से सरकार नहीं बनाना चाहते। अटल बिहारी वाजपेयी ने भी 1996 में 16 दिन तक प्रधानमंत्री रहने के बाद यही बात कहते हुए इस्तीफा दिया था।

2004 में नीतीश कुमार NDA से अलग होकर लालू यादव के करीब आ गए। लालू और नीतीश दोनों UPA-1 में मंत्री बने। लालू रेल मंत्री बने, तो नीतीश कोल और स्टील मंत्री बने। लेकिन, नीतीश की नजर तो बिहार की कुर्सी पर थी। 2005 के विधानसभा चुनाव से पहले वो वापस NDA में आ गए। अक्टूबर 2005 के चुनाव में NDA को बहुमत मिला और नीतीश मुख्यमंत्री बन गए।

2013 में फिर NDA से अलग हुए नीतीश
बात 2013 की है। भाजपा की तरफ से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किए जाने से नाराज होकर नीतीश कुमार ने एनडीए छोड़ दिया था। 2015 में नीतीश की जदयू, राजद और कांग्रेस के साथ महागठबंधन में शामिल हो गई। चुनाव में महागठबंधन को बहुमत मिला। राजद ने 80, जदयू ने 71 और कांग्रेस ने 27 सीटें जीतीं। नीतीश कुमार सीएम बने और तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम।

जुलाई 2017 में तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर नीतीश न सिर्फ महागठबंधन से अलग हुए, बल्कि सीएम पद से भी इस्तीफा दे दिया। 26 जुलाई को नीतीश महागठंबधन से अलग हुए और 27 को NDA के समर्थन से 6वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। नीतीश अब तक 6 बार NDA के समर्थन से और एक बार महागठबंधन के समर्थन से सीएम रह चुके हैं।

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Nitish Kumar Bihar Assembly 7th Times Chief Minister Know Bihar CM Political Career

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