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राॅक बैण्ड, बाॅलीवुड नृत्य संग कवि सम्मेलन ने मंत्र मुग्ध किया [Source: Patrika : India’s Leading Hindi News Portal]

लखनऊ, प्रगति पर्यावरण संरक्षण ट्रस्ट के तत्वावधान में कथा मैदान आशियाना लखनऊ में चल रहे अवध महोत्सव-2021 की नवीं सांस्कृतिक संध्या में राॅक बैण्ड, बाॅलीवुड नृत्य संग कवि सम्मेलन ने मंत्रमुग्ध किया। इस अवसर पर प्रगति पर्यावरण संरक्षण के अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह और उपाध्यक्ष एन बी सिंह ने अवध महोत्सव की नवीं सांस्कृतिक संध्या के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय धर्माचार्य महंत सरोज नाथ योगी को पुष्प गुच्छ, अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंटकर अवध गौरव सम्मान से सम्मानित किया। इस अवसर पर गौरव वर्मा, मोहित बजाज, मोहित मिश्रा, सौरभ चैधरी, मुन्ना निषाद, सौराष्ट्र जीत सिंह, ब्रज भूषण सिंह, प्रिया पाल, पवन पाल, अनुराग शाह सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों के अलावा तमाम दर्शक उपस्थित थे।

आज की सांस्कृतिक संध्या का आरम्भ रिवाइवल द पुर्नत्थान राॅक बैण्ड के कलाकार सचिन मिश्रा ने अपनी खनकती हुई आवाज में रमता योगी को पेश किया तो श्रोता झूम उठे। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सचिन मिश्रा ने अपनी सुमधुर आवाज में हमराज, तुम ही हो, चांद सिफारिश तो करता, बेवफा मासूम चेहरा सहित अन्य राॅक गीतों को सुनाकर श्रोताओं को अपने साथ खुब झुमाया नचाया। राॅक बैण्ड के मेरूदण्ड रहे लीड गिटार पर अभिनय श्याम मिश्रा, बीट बाॅक्सर पर वेद तिवारी और तबले पर दीपक शर्मा।

कार्यक्रम में अवध टैलेन्ट हंट के तहत वर्दा मेहरोत्रा, जया सिंह, इप्शिता अरोड़ा, वैष्णवी रावत, अनु यादव, प्रियांशी वर्मा, आरोही नाहिल, भाव्या आनन्द, आयुष कश्यप, अनिन्दय शर्मा, रश्मि सिंह और राजा निषाद ने अनेक फिल्मी गीतों पर आकर्षक बाॅलीवुड नृत्य की मनोरम छटा बिखेरी। इस पेशकश के उपरान्त हया खान, अविरल प्रताप सिंह, आदित्य, सत्येन्द्र कुमार, करन दिवाकर, हर्षिता चर्तुवेदी, सरगम चैधरी और नवनीत कुमार ने फिल्मी-गैर फिल्मी गीतों को अपनी सुरीली आवाज में सुनाकर श्रोताओं कों मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम का संचालन सम्पूर्ण शुक्ला और अरविन्द सक्सेना ने किया।

हृदय को हर्षातिरेक से भर देने वाली इस प्रस्तुति पश्चात लक्ष्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थान द्वारा कुंवर कुसुमेश की अध्यक्षता, गोबर गणेश के संचालन और शरद पाण्डेय शशांक की वाणी वंदना से आरम्भ हुए कवि सम्मेलन में देवेश मिश्र ने कहा बहुत पढे़ हव निर्मल तबहूं पीछे हव रोज नवा एक खर्च बतावे ऊ हमका। सरिता कटियार ने सुनाया वक्त की उलझन में हम तुम मीटा जबसे हो गए पहले दोहा फिर गजल फिर गीत हम तुम हो गए। कृष्णानन्द राय ने कहा तिरंगे के खातिर वतन पर रहेंगे, वतन की हिफाजत हम सब करेंगे।
इसी क्रम में शरद पाण्डेय शशांक की यह पंक्तियां खुब पसंद की गईं, उनकी बानगी थी अति व्याकुल से हैं विहंग सभी ऋतु वो मतवाली चली गयी है, मनों से खुशियाली चली गई है बनों से हरियाली चली गयी है।

कुंवर कुसुमेश ने कहा समझता नही खुद के आगे किसी को ये क्या हो गया आजकल आदमी को। पंडित बेअदब लखनवी ने सुनाया आए लीडर बहुत से यहां पर मगर कौन कितना है शातिर पता चल गया है। इसके अलावा अनिल कुमार सिंह जयसवार, रवीन्द्र प्रतापगढ़ी, अलका अस्थाना, राम नरेश पाल, सचिन मेहरोत्रा, ऋचा मिश्रा, शेफाली कटियार, मनमोहन बाराकोटी, राम राज भारती,कन्हैया लाल, मयंक किशोर ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को तर-बतर किया। इसके अलावा आज नवोदित साहित्यकार परिषद द्वारा भी कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया।

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