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मांगलिक कार्यों पर विराम, चार माह बाद मुहूर्त्त




काेरोनाकाल का आखिरी सावा मंगलवार को हुअा। बुधवार यानी एक जुलाई को देवशयन एकादशी रहेगी। इसके बाद देव सो जाएंगे और चातुर्मास लग गया। चूंकि इस साल अधिक मास है। इसलिए देवशयन पांच माह का रहेगा। अब शहनाई बजने का इंतजार नवंबर तक करना होगा। देव उत्थान एकादशी 25 नवंबर को है। इस संबंध में मान्यता है कि इस तिथि से चार माह के लिए भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करने चले जाते हैं और फिर देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। इसी दिन से चातुर्मास भी शुरू हो जाएंगे। सोमवार को भड़या नवमी थी। इस दिन बड़ी संख्या में शादियां हुईं। यह अबूझ सावा है तथा कोरोना लॉकडाउन के कारण अटके विवाह सोमवार को हुए। मंगलवार को आशा दशमी थी। बृहस्पति का धनु में प्रवेश हो गया। मेष, मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, धनु व कुंभ व मीन के लिए अच्छा, वृषभ-कन्या के लिए मिलाजुला जबकि कर्क व मकर के लिए प्रतिकूल होगा। दरअसल, लॉकडाउन खोलने के प्रथम चरण अनलॉक 1.0 में अब 29 व 30 जून दो दिन ही शादियों का शुभ मुहूर्त रहा है। इसके बाद नवंबर माह में ही शुभ मांगलिक कार्य शुरू हो सकेंगे। कोरोना वायरस की वजह से इस साल अप्रैल, मई और जून के पखवाड़े तक गिनी-चुनी शादियां ही हुईं। जबकि हर साल अप्रैल, मई-जून में बड़ी संख्या में शादियां हो जाती थी। विवाह आदि नहीं होने से होटल, सर्राफा, गार्डन, टेंट, कपड़ा, परचून, बर्तन से लेकर विभिन्न व्यापार पर भी खासा असर पड़ा है।
बाजार में मंदी का दाैर…बाजार में सावों के कारण आई तेजी अब मंदी में बदल की संभावना है। व्यापारियों का कहना है कि एक बार बूम आने के बाद सन्नाटा आता ही है। इसलिए अगले 15 दिन रुटीन की ग्राहकी भी बहुत कम रहेगी। नवंबर में सिर्फ दो दिन और दिसंबर में सात ही दिन विवाह मुहूर्त रहेंगे। इसके बाद गुरु व शुक्र के अस्त होने पर विवाह मुहूर्त 22 अप्रैल 2021 से प्रारंभ हो सकेंगे। 15 दिसंबर से प्रारंभ खरमास 15 जनवरी तक रहेगा।

25 नवंबर को देवउठनी एकादशी से शुरू होंगे विवाह
पंडित विमल पारीक का कहना है कि अब नवंबर में देवउठनी एकादशी पर 25 नवंबर, 27 नवंबर और 30 नवंबर को मुहूर्त है। वहीं, दिसंबर महीने में 1, 6, 7, 9, 10 और 11 दिसंबर को मुहूर्त है। इस तरह साल 2020 में शादियों के लिए कुल 9 मुहूर्त हैं। वर्ष 2021 में विवाह मुहूर्त अप्रैल से प्रारंभ होंगे। इसकी वजह यह है कि 15 दिसंबर 2020 से प्रारंभ खरमास नए साल में 15 जनवरी तक रहेगा। इसके बाद गुरु व शुक्र ग्रह अस्त होने पर 22 अप्रैल से शहनाइयां बजना शुरू होंगी। गुरु 16 जनवरी को अस्त होकर 13 फरवरी को उदित होगा और 14 फरवरी से शुक्र ग्रह अस्त हो जाएगा, जो 20 अप्रैल तक अस्त रहेगा।

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