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मजदूरों की कमी के चलते ड्रिल और ट्रांसप्लांटर मशीन से रोपाई पर जोर




पंजाब में धान का लगभग 65 लाख एकड़ रकबा है। अब धान की बुवाई और रोपाई का सीजन जोरों पर है। पंजाब एक ऐसा राज्य है जहां पहली बार तीन तरीकों से धान लगाया जा रहा है। लॉकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार आदि राज्यों से लेबर नहीं आने के कारण पहली बार किसानों को ऐसा करना पड़ रहा है। इस बार लेबर की कमी से किसानों ने जीरो टिल मशीन से धान की सीधी बुवाई करने के तरीके को बड़े स्तर पर अपनाया है।

एक अनुमान के मुताबिक राज्य में लगभग 25 फीसदी बुवाई जीरो टिल ड्रिल मशीन से हुई है। यह धान अब खेतों में जड़ पकड़ना शुरू हो गया है। पंजाब में पिछले साल बुवाई के इस तरीके को केवल एक-दो फीसदी किसानों ने ही अपनाया था लेकिन इस बार छोटे-बड़े सब किसानों ने सीधी बुवाई को पहल दी है। इसके आलावा 65 फीसदी क्षेत्रफल में रोपाई लेबर से करवाई जा रही है। इसके साथ ही 10 फीसदी क्षेत्रफल में मैट के जरिए राइस ट्रांसप्लांटर मशीन से रोपाई होने की संभावना है। बता दें कि कभी पंजाब में कद्दू करके ही धान लगाने का रुझान था। इससे पानी की बर्बादी होती है।

किसान बलबीर ने वट्‌टों पर लगाया नई तकनीक से धान

ब्लॉक कलानौर के अधीन आते गांव लखनकलां में किसान बलबीर सिंह काहलों ने पहलकदमी करते हुए पानी बचाने के लिए खेतीबाड़ी माहिरों की सलाह से वट्‌टों पर धान लगाकर मिसाल पेश की। किसान बलबीर सिंह के इस काम की इलाके में खूब चर्चा है। ऐसा करने से खाद व दवाइयां भी कम लगती हैं। किसान बलबीर सिंह काहलों ने बताया कि उन्होंने एक मोटर एक एकड़ को तीन से चार घंटे में भरती है। वहीं वट्‌टों पर धान लगाने से एक घंटे में एक एकड़ में पाानी लग जाता है।

वट्‌टों पर धान लगाने से शुरू में ही पानी और खादें, दवाइयां कम पड़ती हैं। समय के साथ-साथ एक-दो साल के बाद बिल्कुल ही खाद डालने की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें गंडोए अपने आप ही खाद तैयार कर लेते हैं। इस तरह धान की रोपाई में आम तरह खेत में लगाए धान जितना ही खर्च आता है। उन्होंने खेती माहिरों की सलाह से पहली बार इस तरह धान की रोपाई करवाई है, अब इसका रिज्लट क्या होगा, ये तो बाद में पता चलेगा। उन्होंने कहा कि वह अपनी पत्नी जोकि स्कूल प्रिंसिपल हैं, मैडम बलजिंदर कौर से भी समय-समय पर सलाह मश्वरा करते रहते हैं। वहीं, इंटरनेट पर भी खेतीबाड़ी संबंधी सर्च करते रहते हैं। तरह-तरह की फसलें बीजने के लिए उन्होंने धान के साथ-साथ जमीन पर तरह-तरह के फल व सब्जियां भी उगाई हुई हैं। दूसरी ओर प्रिंसिपल बलजिंदर कौर ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने एक बार भी बाजार से सब्जियां और फल नहीं खरीदे हैं, क्योंकि सब खेतों में ही उगाया है।

इन तीन तरीकों से लगाया गया धान

1.जीरो टिल ड्रिल से धान की बुवाई
धान की जीरो टिल ड्रिल से सीधी बुवाई के तरीके को पंजाब में पहली बार किसानों ने अपनाया है। यह बुवाई उचित नमी में खेत की कम जुताई पर होती है। इसमें रोपाई और जुताई पर खर्च होने वाली मोटी रकम बचती है। फसल भी समय से तैयार हो जाती है, दूसरा ड्रिल से लगाया धान हवा के से आसानी से खेत में बिछता नहीं है। धान की बुवाई मानसून आने के पूर्व 20 जून तक करने का समय है। बुवाई के पहले ग्लाइफोसेट की उचित मात्रा को खेत में एक समान छिड़कना चाहिए।

2.लेबर के जरिए रोपाई
पंजाब में लेबर से धान की बुवाई का तरीका बहुत पुराना है। इस तकनीक से कद्दू करने, दोहरी बार खेत जोतने, पानी भरने के लिए डीजल पर भारी भरकम खर्च करना पड़ता है। सरकार भी इस तरीके को बदलने के लिए किसानों को समय-समय जागरुक भी कर रही है। लेकिन फिर भी किसान इसको नही बदल रहे। पंजाब में इस बार लेबर न आने से 65 फीसदी रकबे में लेबर से धान की रोपाई होने का अनुमान है। धान की बुवाई का काम इन दिनों काम तेजी पर है। इस बार पिछले साल से इस तरीके में भारी कमी आई है।

3.मैट पर पनीरी उगाई, ट्रांसप्लांटर से रोपाई
राइस ट्रांसप्लांटर मशीन से रोपाई करने के लिए पनीरी राइस मैट पर तैयार करनी होती है। राइस मैट नर्सरी से कम लागत व अधिक मुनाफा होता है। पानी भी कम लगाने की जरुरत है। राइस मैट नर्सरी विधि से धान के बीज को वर्मी कंपोस्ट के साथ मिट्टी के मिश्रण में बेड पर बिछाया जाता है। जब नर्सरी तैयारी हो जाती है तो बिचड़े को लपेटकर चटाई की तरह उखाड़ लिया जाता है। खेत में नमी करके राइस ट्रांसप्लांटर मशीन के जरिए धान की रोपाई होती हैं।

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