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मंत्रिमंडल के विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों की सुगबुगाहट




कोरोना लंबा चलने की अवधारणा के बीच राज्यसभा चुनाव हो गए। बचे हुए पंचायत और नगर पालिका चुनाव करवाने के लिए वोटर सूचियां तैयार की जा रही है। इसी बीच मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियां होने की संभावना के चलते नेताओं ने राजनीतिक गोटियां फिट करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

पीसीसी की ओर से जिला और ब्लॉक स्तरीय कार्यकर्ताओं के नाम मांगें गए हैं, जिनके जिला और उपखंड स्तरीय विभिन्न कमेटियों का सदस्य बनाया जा सकता है। अब डेढ़ साल बाद सरकार में सहभागिता से वंचित दोनों जिलों को सरकार में प्रतिनिधित्व मिलने संभावना मिली है।

जिले के दो कांग्रेसी विधायक-श्रीकरणपुर के गुरमीत सिंह कुन्नर, सादुलशहर के जगदीश चंद्र जांगिड़ और सरकार को समर्थन देने वाले एक निर्दलीय विधायक श्रीगंगानगर के राजकुमार गौड़ मंत्री बनने की दौड़ में हैं। जिले में राजस्थान पंजाबी भाषा एकेडमी और यूआईटी के अध्यक्ष पद पर भी अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है। इन दोनों पदों पर आसीन होने के लिए भी कई नेता प्रयासरत हैं। कई वरिष्ठ नेता अन्य आयोगों व बोर्डों में जगह बनाने के लिए जोड़तोड़ कर रहे हैं।

श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिले का लंबे समय से राजनीतिक ट्रेंड रहा है कि सरकार गठन होते ही प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। मंत्रिमंडल के विस्तार में ही दोनों जिलों को प्रतिनिधित्व मिलता रहा है। ऐसा वर्ष 2003 से चल रहा है। चाहे कांग्रेस की सरकार रही हो या फिर भाजपा की। श्रीकरणपुर से भाजपा विधायक रहे सुरेंद्रपाल सिंह टीटी और एक बार कांग्रेसी गुरमीत सिंह कुन्नर को विस्तार में ही मंत्री बनने का मौका मिला।

वर्ष 2003 से राजनीतिक परंपरा स्थापित हो गई है कि सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में जिले के किसी विधायक को मंत्री नहीं बनाया जाता। इस अवधि में भाजपा नेता गुरमीत सिंह कुन्नर को दो बार और कांग्रेस नेता गुरमीत सिंह कुन्नर को एक बार मंत्री बनने का मौका मिला। दोनों को विस्तार में ही मंत्री बनाया गया।

छह साल पहले भी मांगे थे नाम : कांग्रेस के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार सहारण के अनुसार संगठन ने विभिन्न कमेटियों में कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों को स्थान देने के लिए नाम मांगे हैं। जिला कांग्रेस, विधायकों, विधानसभा व लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रत्याशी रहे नेताओं से नामों का पैनल मांगा गया है। सहारण के अनुसार किस पदाधिकारी और कार्यकर्ता को कहां नियुक्त करना है, ये सरकार का फैसला होगा।

इसे बारे में अभी ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। इससे पहले अक्टूबर-नवंबर 2019 में भी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के नाम प्रदेश आलाकमान ने मांगे थे। इसके बाद राजनीतिक नियुक्तियां नहीं हुईं। कांग्रेस पदाधिकारियों के अनुसार सरकार बने हुए डेढ़ साल बीत चुका है। अब पुराने कार्यकर्ताओं को जिला एवं ब्लॉक स्तरीय कमेटियों में फिट कर पुरस्कृत करना चाहिए। इससे ही वे उत्साहित होंगे।

जातिगत समीकरणों का होने लगा आकलन, गोटियां फिट करने लगे कांग्रेसी
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार की मांग अंदरूनी तौर पर होने लगी है। इसके लिए इस बार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री व पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच चल रही खींचतान भी अड़ंगा बन रही है। विधायकों के जातिगत समीकरणों व लॉबी का भी आकलन होने लगा ।

विधायक गुरमीत सिंह कुन्नर तीन बार विधायक बन चुके हैं। राज्य सरकार में मंत्री भी रहे हैं। सत्ताधारी पार्टी से एक मात्र सिख विधायक हैं। पंजाब व सिख कोटे से कुन्नर की दावेदारी मानी जा रही है। सादुलशहर के विधायक जगदीश जांगिड़ बीकानेर संभाग के एक मात्र मूल ओबीसी समुदाय के विधायक हैं।

जो कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी के नजदीकी माने जाते हैं। निर्दलीय विधायक राजकुमार गौड़ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमे के हैं। गौड़ ने निर्दलीय चुनाव जीतते ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को समर्थन दिया। गौड़ को मुख्यमंत्री का नजदीकी माना जाता है। लेकिन गौड़ व जांगिड़ पहली बार जीते हैं। चुनावी राजनीति के लिहाज से गुरमीत सिंह कुन्नर वरिष्ठ हैं।

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