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भारतीय पावर एक्सचेंज पर नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के भी विक्रेता व खरीदार ट्रेड कर सकेंगे




जल्द ही पड़ोसी देशों के खरीदार व विक्रेता भारतीय पावर एक्सचेंज पर ट्र्रेड कर सकेंगे। सरकार पड़ोसी देशों के साथ बिजली की खरीद-बिक्री करना चाहती है। पिछले साल इसके लिए नियम तय किए गए थे। शुरू में नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के विक्रेता व खरीदार इंडिया एनर्जी एक्सचेंज (आईईएक्स) पर ट्रेड कर पाएंगे। आईईएक्स भारत का सबसे बड़ा पावर एक्सचेंज है।

पड़ोसी देशों के खरीदार हालांकि भारतीय एक्सचेंज पर सीधे खुद ट्रेड नहीं कर पाएंगे। उन्हें भारत के किसी इलेक्ट्र्रिसिटी ट्र्रेडिंग लाइसेंसी के जरिये ट्रेड करना होगा। यह ट्रेडिंग दो देशों के द्वीपक्षीय समझौते या बिडिंग रूट या संस्थानों के बीच आपसी समझौते के जरिये होगी। आईईएक्स के बिजनेस डेवलपमेंट प्रमुख रोहित बजाज ने कहा कि यह सुविधा अगले कुछ महीने में शुरू हो जाने की उम्मीद है।

भारतीय उत्पादन कंपनियां सरप्लस बिजली पड़ोसी देशों को बेच पाएंगी

अभी टर्म अहेड माकेट (टीएएम) सेगमेंट में पड़ोसी देशों के साथ पावर ट्रेडिंग हो रही है। इसके तहत भारत बांग्लादेश को बिजली का निर्यात करता है। यह ट्र्रेडिंग एक्सचेंज के जरिये शॉर्ट टर्म पावर पर्चेज के लिए नहीं हो रही है। बजाज ने कहा कि शॉर्ट टर्म मार्केट में सीमा के आर-पार ट्रेडिंग शुरू हो जाने के बाद भारतीय उत्पादन कंपनियां अपनी सरप्लस बिजली पड़ोसी देशों के खरीदारों को बेच पाएंगी।

भारत के उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा का अनुपात बढ़ सकेगा

नेपाल और बांग्लादेश के खरीदार जहां एक्सचेंज के जरिये भारत से बिजली खरीद पाएंगे। वहीं भूटान अपनी सरप्लस बिजली एक्सचेंज के जरिये भारत को बेच पाएगा। इसका लाभ भारत को भी मिलेगा। भारत के उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा का अनुपात बढ़ सकेगा।

इंफ्रास्ट्र्रक्चर बनने पर म्यांमार और श्रीलंका जैसे देशों के साथ भी एक्सचेंज के जरिये ट्रेडिंग शुरू होगी

नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के साथ भारत का ट्रांसमिशन लिंक पहले से बना हुआ है। इसलिए एक्सचेंज के जरिये उनके साथ पावर ट्रेडिंग तुरंत शुरू हो सकता है। जरूरी इंफ्रास्ट्र्रक्चर तैयार होने पर म्यांमार और श्रीलंका जैसे देशों के साथ भी एक्सचेंज के जरिये ट्रेडिंग शुरू हो सकती है।

एक्सचेंज पर ट्रेडिंग में शुरू में पड़ोसी देशों से 300-400 मेगावाट बिजली की मांग आ सकती है

बिजली मार्केट में पहले से ही मांग कम चल रही है। कोरोनावायरस महामारी फैलने के बाद मांग और घट गई। इससे देश की बिजली कंपनियां सरप्लस बिजली बेचने के लिए अतिरिक्त बाजार तलाश कर रही हैं। एक्सचेंज के जरिये पड़ोसी देशों के साथ ट्र्रेडिंग शुरू होने से उन्हें अपनी कुछ सरप्लस बिजली बेचने का अवसर मिलेगा। जानकारों के मुताबिक एक्सचेंज के जरिये स्पॉट ट्रेडिंग में शुरू में 300-400 मेगावाट बिजली की मांग आ सकती है।

भारत अभी बांग्लादेश, नेपाल व म्यांमार को 1703 मेगावाट बिजली बेचता है

अभी भारत, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और म्यांमार के बीच करीब 3,000 मेगावाट बिजली की ट्र्रेडिंग होती है। भारत हर साल 1,200-1,500 मेगावाट बिजली भूटान से खरीदता है, जबकि बांग्लादेश को 1,200 मेगावाट, नेपाल को 500 मेगावाट और म्यांमार को 3 मेगावाट बिजली बेचता है।

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