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बिजली निगम पर 5670 करोड़ रुपए बकाए भुगतान की डेडलाइन खत्म, निगम ने डीवीसी से कहा- लॉकडाउन से पेमेंट देने में दिक्कत




डीवीसी के बिजली कटौती के अल्टीमेटम का 30 जून को अंतिम दिन है। डीवीसी ने बिजली निगम को पहले ही सूचना दे दी थी कि अगर बिजली निगम 5670 करोड़ का बकाया भुगतान नहीं करता तो 1 जुलाई से बिजली कटौती करेगा। डीवीसी सात जिलों में बिजली आपूर्ति करता है, जिसका भुगतान बिजली निगम करती है। डीवीसी धनबाद, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, देवघर, गिरिडीह, कोडरमा, हजारीबाग और चतरा में 700 मेगवाट बिजली की आपूर्ति करता है।

इधर झारखंड बिजली वितरण निगम ने स्पष्ट किया है कि डीवीसी को फिलहाल बकाया भुगतान करने की स्थिति में नहीं है। क्योंकि लॉकडाउन में राजस्व उगाही की स्थिति अच्छी नहीं रही। निगम के कार्यकारी निदेशक केके वर्मा ने बताया कि केंद्रीय उर्जा मंत्रालय कोरोना के बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की स्थिति को देखते हुए ही 90 हजार करोड़ के पैकेज की घोषणा की है। जिसके तहत झारखंड ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय से 5 हजार करोड़ की मांग की है।

बिजली निगम ने कहा…डीवीसी ऊर्जा मंत्रालय से सीधे लेंपैसा
यह पैसा डीवीसी, एनटीपीसी सहित अन्य बकायदारों को भुगतान किया जाएगा। अगर डीवीसी को बहुत अधिक दिक्कत है , तो वह सीधे तौर पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय से बतौर लोन पैसा ले सकता है। जिसका हिसाब-किताब बाद में बिजली वितरण निगम डीवीसी के साथ कर लेगा। वर्मा ने बताया कि डीवीसी प्रबंधन से लगातार निगम की बात हो रही है। इस आशय का पत्र डीवीसी प्रबंधन को भेजा जा रहा है।

18 घंटे तक की हो सकती है कटौती
डीवीसी ने जेबीवीएनएल पर 5670 करोड़ रुपए का बकाया बिजली बिल वसूलने के लिए दबाव बढ़ा दिया है। बकाया बिजली बिल नहीं देने पर एक जुलाई से फिर से बिजली कटौती करने की चेतावनी दी है। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड को आज 30 जून तक डीवीसी ने बकाया भुगतान करने को कहा है। भुगतान नहीं होने पर जुलाई महीने से बिजली में भारी कटौती की जाएगी। यह कटौती 18 घंटे तक हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो एक जुलाई से डीवीसी के कमांड क्षेत्र में आने वाले धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, कोडरमा, हजारीबाग व चतरा में अंधेरा छा जाएगा।

इधर, चैंबर बोला… उपभोक्ताओं को विवाद में प्रताड़ित करना ठीक नही

डीवीसी के बिजली कटौती करने के अल्टीमेटम पर चैंबर ने आपत्ति जताई है। अध्यक्ष कुणाल अजमानी ने कहा है कि कई वर्षों से हर चार-पांच महीने के अंतराल पर डीवीसी द्वारा ऐसी स्थिति पैदा कर दी जाती हैं। बिजली कटौती शुरू होने के बाद राज्य सरकार द्वारा डीवीसी से बात कर एक छोटी अवधि के लिए परेशानी को टालने की कोशिश की जाती है। इसका खामियाजा सात जिले को उपभोक्ताओं झेलना पड़ता है।

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