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बच्चों के बिना आज से खुले स्कूल, जो शिक्षक नहीं पहुंचे, वो पहले दिन ही इस कार्रवाई के लिए रहें तैयार

लखनऊ. आज से यूपी में बेसिक शिक्षा विभाग के सभी परिषदीय स्कूल खुल गए हैं। सभी शिक्षकों को स्कूल में रहने के आदेश हैं। इस दौरान उन्हें मुख्य रूप से लॉकडाउन अवधि और गर्मी की छुट्टियों के कुल 76 दिनों का मिड डे मील राशन और कन्वर्जन कॉस्ट को बच्चों के अभिभावकों तक पहुंचाना की तैयारी करनी होगी। बेसिक शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद के मुताबिक परिषदीय शिक्षकों समेत शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को भी स्कूल आना होगा। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आज से सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को समय से स्कूल जाकर सारे कामों को पूरा करना है। स्कूल न जाने वाले और अपने काम में लापरवाही करने वाले शिक्षकों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

पहला हफ्ता होगा चुनौती

दरअसल स्कूल का पहला हफ्ता शिक्षकों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। स्कूलों का सैनिटाइजेशन और साफ-सफाई का काम तक अभी नहीं हो सका है। जिससे कोरोना संक्रमण के खतरे को लेकर शिक्षक पहले से डरे हुए हैं। इसके अलावा स्कूल परिसर में बड़ी-बड़ी घास और झाड़ियां भी उग आई हैं। वहीं एक तरफ आज से स्कूल खुले तो दूसरी तरफ प्रदेश के शिक्षकों ने इसका विरोध जताना भी शुरू कर दिया। शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर इस आदेश को गलत बताया बताया है। शिक्षकं का कहना है कि उन्हें स्कूल तक जान में काफी लम्बी दूरी तय करना पड़ता है। ऐसे में सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करके जाना कोरोना संक्रमण के लिहाज से सही नहीं है।

शिक्षकों ने फैसले को बताया गलत

वहीं विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि शिक्षकों ने लॉकडाउन में अपने सभी काम पूरी निष्ठा से निभाए लेकिन स्कूल जाने का मतलब नहीं समझ आ रहा है, जबकि स्कूलों में बच्चे नहीं होंगे। दूर के गांवों में सार्वजनिक वाहनों में सवारियां भर कर चलाई जाती हैं ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग नहीं रह जाती। कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए यह फैसला ठीक नहीं है। इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए। यहां तक शिक्षकों द्वारा स्कूल बंद रहने की अवधि में किए जाने वाले कामों की सूची भी जारी की गई है। शिक्षकों ने इसमें ऑपरेशन कायाकल्प, मानव संपदा पोर्टल, दीक्षा पोर्टल, ऑनलाइन प्रशिक्षण आदि काम शामिल किये हैं।

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