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पूर्व सांसद के गुर्गों ने कराया था अजीत सिंह के शूटर का इलाज, तीन दिन रहा अस्पताल में भर्ती [Source: Patrika : India’s Leading Hindi News Portal]

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. राजधानी लखनऊ के विभूतिखंड के कठौता चौराहे पर गैंगवार में मऊ के पूर्व ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह की हत्या के पीछे बाहुबली पूर्व सांसद का हाथ होने के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस अफसरों ने बताया कि अजीत पर गोलीबारी के दौरान घायल एक शूटर का पूर्व सांसद के कृष्णानगर के मानसनगर निवासी गुर्गे विपुल ने इलाज कराया था। वह उसे पूर्व सांसद के करीबी सुल्तानपुर निवासी डॉक्टर की क्लीनिक पर भी ले गया था। इस बीच तीन अन्य शूटरों को पूर्व सांसद ने उज्जैन के रास्ते मुंबई भेजा। पुलिस ने विपुल की तलाश में दबिश दी, पर वह भाग निकला। उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है। फोन से उसकी व पूर्व सांसद की व्हाट्सएप चैट व कॉल के कई रिकॉर्ड मिले हैं।

अजीत सिंह और उसकी हत्या करने आए शूटरों के बीच गोलीबारी में एक शूटर के पेट में बायीं ओर गोली लगी थी। पुलिस अफसरों का कहना है कि घायल शूटर कन्हैया विश्वकर्मा उर्फ गिरधारी उर्फ डॉक्टर नहीं है। उसकी मदद पूर्व सांसद के गुर्गे विपुल ने की। वह उसे विभूतिखंड स्थित अपार्टमेंट के फ्लैट में ले गया। शूटर के घायल होने की जानकारी पाकर पूर्व सांसद ने अपने परिचित डॉक्टर को फ्लैट पर बुलवाकर इलाज कराया।

पुलिस के मुताबिक शूटर की हालत बिगड़ने लगी तो गुरुवार सुबह करीब सवा पांच बजे उसे कार से सुल्तानपुर ले जाया गया। यहां पूर्व सांसद के करीबी डॉ. एके सिंह तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती शूटर का इलाज करते रहे। इस बीच पुलिस को भनक लग गई। हालांकि, उसके अस्पताल पहुंचने से पहले ही शनिवार दोपहर करीब 12 बजे शूटर को गायब कर दिया गया।

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पुलिस ने खंगाले अस्पताल के रिकॉर्ड

पुलिस ने अस्पताल के रिकॉर्ड खंगाले तो पता चला कि शूटर को फर्जी नाम-पते से भर्ती कराया गया था। उसके तीमारदार के रूप में विपुल का मोबाइल नंबर था। पुलिस ने नंबर का ब्यौरा खंगाला तो पूर्व सांसद का नाम सामने आया। विपुल के मानसनगर स्थित घर पर दबिश दी गई, लेकिन वह नहीं मिला। पुलिस को उसका मोबाइल फोन मिल गया है। सूत्रों का कहना है कि विपुल के मोबाइल फोन पर पूर्व सांसद से व्हाट्सएप चैट और कॉल का रिकॉर्ड मिला है। हत्याकांड में शामिल बाकी तीन शूटर को पूर्व सांसद के गुर्गे उज्जैन तक छोड़ आए, जहां से उन्हें दूसरी टीम मुंबई ले गई। हालांकि हत्यारों की मदद करने के तमाम साक्ष्य मिलने के बाद भी दोनों डॉक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्हें हत्याकांड की साजिश में शामिल तक नहीं बताया गया।

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