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नवजात शिशु की कैसे करे देखभाल,जानिए डॉ की राय [Source: Patrika : India’s Leading Hindi News Portal]

लखनऊ, लखनऊ निवासी किरण और निशा को प्रसव समय से पहले हो गया और उनके नवजात का वजन जन्म के समय क्रमशः 1.8 किलोग्राम और 1.2 किलोग्राम था । इन बच्चों को जन्म के बाद हाइपोथर्मिया या ठंडे बुखार से बचाने के लिए चिकित्सकों ने कंगारू मदर केयर के लिए प्रसूता को केएमसी की सलाह दी।
बलरामपुर जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. देवेन्द्र सिंह बताते हैं। ऐसे बच्चे जिनका जन्म समय से पहले हो जाता है और वजन 2.5 किग्रा से कम होता है या ऐसे बच्चे जिनका जन्म समय से तो होता है लेकिन वजन 2.5 किग्रा से कम होता है तब इस स्थिति में नवजात में हाइपोथर्मिया या ठंडे बुखार के होने की संभावना अधिक होती है । हाईपोथर्मिया की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब नवजात के शरीर का तापमान 36.5 डिग्री से कम हो जाता है । ऐसे में हम प्रसूता को केएमसी की सलाह देते हैं ताकि नवजात का शरीर गर्म रहे । इस विधि में नवजात शिशु को माता,पिता,देखभालकर्ता द्वारा त्वचा से थेरेपी देकर नियंत्रित किया जाता है।

डा. देवेन्द्र के अनुसार यदि नवजात के हाथ, पैर व पेट ठंडे हों तो सबसे पहले उसे माँ के सीने से लगाकर कंगारू मदर केयर (केएमसी) देकर उसके शरीर का तापमान नियंत्रित करना चाहिए। जिस कमरे में नवजात रहता है, उसे भी गरम रखना चाहिए । जाड़े में नवजात को सामान्य कपड़ों से 5 -6 अधिक कपड़े पहनाएँ। बच्चे के हाथ, पैर व सिर ढक कर रखें। उन्हें खुला नहीं छोड़ना चाहिए। माँ का दूध अवश्य पिलाएँ, यह हाइपोथर्मिया से बचाता है। गर्मियों में नवजात को 24 घंटे के बाद पोंछना चाहिए जबकि कमजोर बच्चे या ऐसे बच्चे जिनका जन्म समय से पहले होता है उन्हें नाल गिरने तक नहीं नहलाना चाहिए।

हाइपोथर्मिया के प्रबंधन के लिए सबसे जरूरी इससे बचाव है। ऐसी स्थिति आने ही नहीं देनी चाहिए। इसके लिए जन्म के तुरंत बाद नवजात को माँ के पेट पर, पेट के बल लिटा दिया जाता है या प्री हीटेड बेसिनेट में रखा जाता है। बच्चे को कपड़े से पोंछकर सुखाना चाहिए, शरीर को गर्म शीट में लपेटना चाहिए और सिर को भी ढक देना चाहिए। नवजात को माँ का दूध पिलाना चाहिए । माँ के दूध में बच्चे के लिए सम्पूर्ण पोषण होता है। हाइपोथर्मिया की स्थिति में न तो बच्चे का वजन लेना चाहिए और न ही उसको नहलाना चाहिए। शोध से यह निष्कर्ष भी सामने आये हैं कि केएमसी से नवजात का वजन भी बढ़ता है और माँ और बच्चे में भावनात्मक लगाव अधिक होता है।

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