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तालाबों में अत्यधिक पानी, सोशल डिस्टेंसिंग के लिए छोटे जलाशयों में भी मना सकते छठ [Source: Dainik Bhaskar]



इस वर्ष पर्याप्त बारिश के कारण नदी-तालाबाें में अत्यधिक पानी है। इसलिए छठ महापर्व के दाैरान पूरी सतर्कता रखें। काेराेना काे लेकर साेशल डिस्टेंसिंग के साथ छठ मनाने की छूट मिली है। ऐसे में जलजमाव वाले छोटे आहर, पइन के किनारे भी अर्घ्य दे सकते हैं। कहीं भी इस बार पानी की कमी नहीं हाेगी। इसके पहले के वर्षाें में ताे तालाबों के सूख जाने के कारण पंपिंग सेट से पानी डालना होता था।

इस कारण लाेग बड़े जलाशयाें में छठ मनाते रहे हैं, जहां साेशल डिस्टेंसिंग में कठिनाई हाे सकती है। लेकिन, इस बार सामान्य से डेढ़ गुनी अधिक बारिश होने के कारण स्थिति बदली हुई है। यूं ताे अत्यधिक बारिश के कारण फसलें बर्बाद हुईं और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

लेकिन, इस कोरोना काल में आस्था का महापर्व छठ मनाने में काफी सहूलियत होगी। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ नदी-तालाब समेत छोटे आहर, पइन, गड्ढे, चाैर के किनारे भी सूर्याेपासना के इस महापर्व काे मना सकते हैं।

अभी जिले के 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में है पानी

जल क्षेत्र क्षेत्रफल

छोटे-बड़े तालाब 20 हजार हेक्टेयर
आहर-पइन 10 हजार हेक्टेयर
चौर क्षेत्र 20 हजार हेक्टेयर

छठ महापर्व : नहाय-खाय के साथ कल से होगी शुरुआत

मुजफ्फरपुर. लोक आस्था का 4 दिवसीय छठ महापर्व बुधवार 18 नवंबर से नहाय-खाय के साथ शुरू होगा। 19 काे खरना, 20 काे अस्ताचलगामी सूर्य काे अर्घ्य व 21 नवंबर काे उदयगामी सूर्य काे अर्घ्य देने के बाद व्रती पारण करेंगे।

व्रती नहाय खाय के दिन स्नान के बाद नए वस्त्र धारण कर शाकाहारी भोजन करते हैं। अगले दिन खरना काे दिनभर अन्न-जल ग्रहण किए बिना उपवास रख संध्या में चावल व गुड़ से बनी खीर बना घी लगी रोटी भगवान भास्कर काे अर्पण कर प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं। संध्या अर्घ्य के दिन विशेष ताैर पर ठेकुआ, केला, नींबू, नारियल, सेव, संतरा, खाजा एवं बताशा अादि काे डाला में सजाकर घाट पर ले जाते हैं।

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इस वर्ष इतनी बारिश हुई कि तालाबों से निकालना पड़ रहा है पानी

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