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टिडि्डयों का खतरा टला नहीं, पाकिस्तान और सीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में सक्रिय हो सकते हैं टिड्‌डी दल




राजस्थान में टिडि्डयों का खतरा फिलहाल टला नहीं है। सीमा के निकट भारत औरपाकिस्तान में टिडि्डयों ने बड़ी संख्या में अंडे देना शुरू किए हैं। साथ ही इनमें से निकला फाका पैदल ही तारबंदी के नीचे से होकर भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहा है। वहीं, भारतीय सीमा के निकट सिंध प्रांत में टिडि्डयों ने बड़ी संख्या में अंडे दिए हैं। जबकि खैबर पख्तूनवा प्रांत से टिडि्डयों के बड़े दल उड़ान भरने की तैयारी में है। दूसरी तरफ ईरान से सटी पाकिस्तान की सीमा से आएटिड्‌डे फसलों पर हमला करते हुए आगे बढ़ने की तैयारी में हैं।

संयुक्त राष्ट्र संघ के संगठन एफएओ (फूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन) ने यह ताजा चेतावनी जारी की है। एफएओ ने कहा है कि पाकिस्तान से सटी भारतीय सीमा के भीतर पश्चिमी राजस्थान में टिड्डियों ने अंडे देना भी शुरू कर दिए हैं। ऐसे में अगर इन्हे कंट्रोल नहीं किया जाता तो टिड्डियों की संख्या काफी अधिक बढ़ सकती है। संगठन के अनुसार, टिडि्डयों के कुछ समूह पश्चिमी राजस्थान में सक्रिय है।

टिड्‌डी नियंत्रण संगठन के उप निदेशक केएल गुर्जर का कहना है कि मानसून के सक्रिय होने के साथ हवा के रूख में भी बदलाव आएगा और देश में आगे बढ़ चुके टिड्‌डी दल वापस रेगिस्तान की तरफ भी आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि टिडि्डयों का खतरा टला नहीं है। एफएओ की चेतावनी से स्पष्ट है कि पाकिस्तान में टिड्‌डी नियंत्रण का कार्य प्रभावी तरीके से नहीं चल रहा है। ऐसे में अंडों से हॉपर निकलते ही इन्हें मारने का काम कारगर साबित नहीं हो रहा है। इस कारण टिडि्डयों के नए समूहों के हमले की आशंका बढ़ती जा रही है।

ऐसा माना जा रहा है कि जुलाई माह में एक बार फिर टिडि्डयों का बड़ा हमला हो सकता है। जबकि टिडि्डयों को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका यही है कि अंडों से फाका निकलते ही स्प्रे कर उसे समाप्त कर दिया जाए। उड़ने में असमर्थ होने के कारण इन्हें इस अवस्था में आसानी से मारा जा सकता है।

किसानों का सताने लगा टिडि्डयों का भय
राजस्थान में मानसून पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है। इसके साथ किसानों ने खेतों में बुवाई भी कर दी है और फसलें अंकुरित भी हो चुकी हैं। खेतों में हरियाली नजर आना शुरू हो चुकी है। यदि अब टिडि्डयों ने हमला बोला तो उगती हुई फसल के चौपट होने का भय किसानों को सता रहा है। गत एक वर्ष से किसान सरकारी मशीनरी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर टिडि्डयों का खात्मा करने में जुटे हैं। एक बरस में काफी नुकसान झेल चुके पश्चिमी राजस्थान के किसान एक बार फिर टिडि्डयों से निपटने को पूरी तरह से तैयार नजर आ रहे हैं।

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            <figcaption>इस तरह एक थैली में 60 से 100 तक अंडे देती है एक टिड्‌डी।</figcaption>
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