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जीवन के अच्छे व बुरे कर्मों के नतीजों का भूटान के बौद्ध लामाओं ने नृत्य के माध्यम से किया प्रदर्शित [Source: Dainik Bhaskar]



इच्छा और क्रोध की नकारात्मक भावनाओं को रौंदते हुए लामाओं ने बोधगया के ड्रूक थुबतेन छोलिंग शांडूंग बौद्ध मठ में मुखौटा नृत्य किया। मठ के सचिव लामा सोनम ने बताया कि दूसरे दिन यमराज को प्रभावित करने व बुरी आत्माओं व नकारात्मक शक्ति को वश में करने के लिए लामाओं ने मुखौटा पहन कर छम नृत्य किया। गुरू रिनपोछे के क्रोधी रूप में गुरु ड्रैगपो (क्रोधी गुरु या भयंकर वज्र) के रूप में उनके बारह देवता परिचारकों के साथ नृत्य किया गया।

रक्षा मंगच्छम में यह दर्शाया गया कि कैसे एक मृत व्यक्ति के जीवन भर के संचित पापों और गुणों को आंका जाता है। जब एक व्यक्ति का जन्म होता है, तो वह भगवान और राक्षस अर्थात अच्छे व बुरे स्वभाव के साथ आता है। पहले दिन से ही उसके कर्मों का लेखाजोखा वे रिकॉर्ड करते हैं। नृत्य को देखने से मृत्यु के बाद जीवन की वास्तविकता सभी को पता चलता है। नृत्य दो व्यक्तित्वों की विशिष्टता को चित्रित करता है: पापी (नेलवाबूम) और पुण्य पुरुष (चिम्दपेल्के)। पापी को नरक और अच्छे कर्ता को स्वर्ग भेजा जाता है।

नृत्य के हैं प्रमुख पात्र
रक्षा मंगच्छम मृत्यु के भगवान के दरबार में मृत्यु के बाद पूर्ण परीक्षण प्रणाली को चित्रित करता है। इसमें शिनजे छोगेलेल (लॉर्ड ऑफ डेथ), ल्हा करपो (सफेद देवता) और ड्रेनेकचुंग (काला दानव) तीन मुख्य पात्र हैं। जम्पलींग (मंजुश्री), चेनरिजिग (अवलोकितेश्वर) और चना दोरजी (वज्रापाणी) का प्रतिनिधित्व करता है। यह नृत्य चार से पांच घंटे तक चला। शिनजे छोगेलेल (लॉर्ड ऑफ डेथ), लाह करपो (श्वेत देवता) और ड्रेनेकचुंग (काला दानव) को तीन मुख्य मास्क नर्तक के रूप में चित्रित किया गया। ड्रेनेकचुंग बुरे मृतकों का प्रतिनिधित्व करता है और उसकी पोशाक और मुखौटा लोगों को पाप के प्रतिफल की याद दिलाता है।

क्यों शुरू हुई नकारात्मक शक्ति को बांधने को नृत्य की शुरूआत
तिब्बत में एक बौद्ध विहार के निर्माण में अनेक प्रकार की बाधाएं पैदा होने लगी। तब वहां के तत्कालीन राजा ने गुरू पद्मसंभव को आमंत्रित किया, जो तंत्रविद्या के प्रकांड विद्वान थे। उन्होंने वहां पहुंचकर दोर्जे-गुर-छम नामक तांत्रिक नृत्यानुष्ठान करके विहार के निर्माण में बाधक तत्त्वों को समाप्त किया।

अज्ञानता को दूर करने का है प्रतीक
मुखौटा के सहारे गुरु ड्रैगपो को तीन उभरी हुई आंखों के साथ चित्रित किया गया। वह खोपड़ी, सोने की बालियों के मुकुट से सुशोभित है। वह अपने बाएं हाथ में एक बिच्छू(प्रतीक) और अपने दाहिने में एक अनुष्ठानिक खंजर रखा था। लामा ने गुरु ड्रैगपो को एक अनुष्ठान खंजर के रूप में चित्रित किया, जो क्रोध, इच्छा और अज्ञान को वश में करने का प्रतीक है। यह एक वशीकरण नृत्य है, जहां क्षेत्र में किसी भी बुरे प्रभाव या आत्माओं को गुरु ड्रैगपो के शक्तिशाली देवताओं द्वारा घेर लिया जाता है। बुरी आत्माओं को देवताओं द्वारा घेर लिया जाता है और नष्ट कर दिया जाता है।

मृत्यु का प्रतीक है शिंजे छोगेल
लामा सोनम ने बताया, शिंजे छोगेल मृत्यु के स्वामी है। उनका मास्क तीन आंखों वाला डरावना है। वह अपने दाहिने हाथ में एक थ्रैमसिंग लिए हैं, जो संकेत देता हैं कि दुनिया से मर चुका है, और बाईं ओर एक दर्पण से दिखाता है कि मृतक इंसान के रूप में एक अच्छा व बुरा इंसान है। उसके दाहिने ओर लखकर्पो है। वह पूरी तरह से सफेद है और बाएं हाथ में एक माला रखता है। दाहिने हाथ में सफेद पत्थरों को रखता है जो जीवित रहने पर व्यक्ति द्वारा किए गए अच्छे काम का हिसाब करता है।

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Bhutan’s Buddhist Lamas demonstrated the results of good and bad deeds in life through dance

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