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छठ महापर्व गाइडलाइन पर विवाद; फैसले के खिलाफ आक्रोश, जगह-जगह प्रदर्शन, जल सत्याग्रह से लेकर सरकार के पुतले तक फूंके [Source: Dainik Bhaskar]



पिछले 10 दिनों से चल रही छठ की तैयारियों के बीच रविवार की रात महापर्व को लेकर जारी गाइडलाइन के बाद अब नया विवाद शुरू हो गया है। प्रशासन ने जहां नदी, तालाब व डैम किनारे छठ पूजा के आयोजन पर पाबंदी लगा दी है, वहीं दूसरी ओर पूजा समितियों ने ऐलान कर दिया है कि हमारी तैयारी पूरी है। व्रती पहले की तरह ही अपने तय घाटों पर पूजा करेंगे। मेयर-डिप्टी मेयर भी सरकार के फैसले के विरोध में हैं। सोमवार को पूरे दिन शहर के विभिन्न इलाकों में कहीं प्रदर्शन हुए, तो कहीं हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। कई पूजा समितियों ने विरोध में सरकार का भी पुतला फूंका।

इनकी मांग है कि सरकार अपना आदेश वापस ले और घाटों पर छठ की अनुमति दे। सूर्यांश भारत मिशन ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया है कि नदी-तालाब और डैम किनारे छठ महापर्व करने की अनुमति दी जाए। मुख्यमंत्री प्रतिबंध पर पुनर्विचार करें। सरकार को आस्था से जुड़े मुद्दे पर सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए। मिशन की सचिव शालिनी साहनी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है जब राज्य में उप चुनाव कराए जा सकते हैं तो छठ पर तालाब में डुबकियां लगाने पर क्यों आपत्ति है। बार-बार डुबकियां लगा कर ही सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है बिना डुबकी लगाए छठ महापर्व पूरा नहीं होता।

मेयर बोलीं, जीत पर विजय जुलूस निकाले गए, तो अब रोक क्यों
कोरोना काल मे राज्य की दो विधानसभा सीटों का उपचुनाव हुआ। दोनों सीट पर महागठबंधन की जीत पर विजय जुलूस निकाले गए। दुर्गापूजा व दीपावली का त्योहार भी उमंग और उत्साह के साथ मनाया गया। अब दीपावली के ठीक एक दिन बाद छठ महापर्व को लेकर गाइडलाइन जारी करने के पीछे राज्य सरकार की मंशा ठीक नहीं है। छठ महापर्व सादगी व पवित्रता के साथ मनाया जाता है। इस पर रोक क्याें।

पूजा समितियाें का एलान… व्रती जहां छठ करती हैं वहीं जाएं, पूरी व्यवस्था रहेगी, सरकार आदेश वापस ले

सोमवार को शहर व आसपास की 42 छठ पूजा समितियों के प्रतिनिधियों की बैठक चडरी तालाब प्रांगण में हुई। इसमें सभी ने महापर्व को घाट पर ही मनाने की मांग की। घाट पर ही सरकार का पुतला फूंका गया। बैठक में उपस्थित स्टूडेंट्स फेडरेशन बड़ा तालाब के संस्थापक राजीव रंजन मिश्रा ने कहा कि जो व्रती जिस घाट पर छठ करते हैं वहीं करें। सरकार आदेश वापस ले नहीं तो आंदोलन तेज होगा। इधर, उत्तम यादव ने मंगलवार को सरकार के निर्णय के विरोध में मशाल जुलूस व बुधवार से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने की बात कही।

  • सरकार ने कोरोना के खतरे को देखते हुए नदी, तालाब व डैम किनारे छठ के आयोजन पर लगाई है रोक
  • लोगों ने उठाए सवाल… जब राज्य में उप चुनाव कराए जा सकते हैं तो छठ के आयोजन पर आपत्ति क्यों?
  • गाइडलाइन के विरोध में समितियां आज निकालेंगी मशाल जुलूस, कल से करेंगी अनिश्चितकालीन अनशन
  • पूजा समितियों ने दी चेतावनी… सरकार अगर अपना आदेश वापस नहीं लेती तो और तेज होगा आंदोलन

पूजा समितियाें का एलान… व्रती जहां छठ करती हैं वहीं जाएं, पूरी व्यवस्था रहेगी, सरकार आदेश वापस ले

सोमवार को शहर व आसपास की 42 छठ पूजा समितियों के प्रतिनिधियों की बैठक चडरी तालाब प्रांगण में हुई। इसमें सभी ने महापर्व को घाट पर ही मनाने की मांग की। घाट पर ही सरकार का पुतला फूंका गया। बैठक में उपस्थित स्टूडेंट्स फेडरेशन बड़ा तालाब के संस्थापक राजीव रंजन मिश्रा ने कहा कि जो व्रती जिस घाट पर छठ करते हैं वहीं करें। सरकार आदेश वापस ले नहीं तो आंदोलन तेज होगा। इधर, उत्तम यादव ने मंगलवार को सरकार के निर्णय के विरोध में मशाल जुलूस व बुधवार से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने की बात कही।

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Controversy over Chhath Mahaparva Guideline; Outrage against the decision, protests everywhere, from water satyagraha to effigies of government

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