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गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच हो – राज्यपाल [Source: Patrika : India’s Leading Hindi News Portal]

लखनऊः प्रदेश के समस्त जिलों में महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से तैयार पोषण सामग्री का वितरण किया जाय। ये निर्देश उत्तर प्रदेश की राज्यपाल द्वारा राजभवन में किये गये प्रस्तुतीकरण पर सम्बन्धित अधिकारियेां को दिये। उन्होंने कहा कि एक टाइम आंगनबाड़ी के बच्चों को पोषण मिलना आवश्यकता है, यदि जरूरी हो तो महिला स्वयं सहायता समूहों को अग्रिम भुगतान की व्यवस्था की जाय इसके साथ ही आंगनबाड़ी केन्द्रों पर खाना पकाने के लिए जरूरी सामग्री जैसे एल0पी0जी0 गैस, बर्तन तथा खाद्य सामग्री भी दी जाय ताकि गर्म एवं ताजा पौष्टिक आहार बच्चों को उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने कहा कि जहां कहीं अक्षय पात्र संस्थाएं हैं, वहां पर उनकी सेवाएं ली जा सकती हैं।

राज्यपाल ने कहा कि निर्माण क्षेत्र में जो श्रमिक महिलाएं कार्य कर रही हैं। उनकी भी नियमित जांच की व्यवस्था होनी चाहिए, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं एनीमियां की शिकार हैं। ऐसी गर्भवती महिलाओं से जो बच्चे पैदा होते हैं, वे जन्म से ही कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। अतः हमें जच्चा एवं बच्चा दोनों के उचित पोषण पर गंभीतापूर्वक ध्यान देना है और इस कार्य के लिये हमें अपने आंगनबाड़ी केन्द्रों को मजबूती देने के साथ-साथ उन्हें आवश्यक संसाधन देने ही होंगे। साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को उचित प्रशिक्षण भी देना होगा। ये कार्य हमें अच्छी सोच के साथ करने हैं।

उचित होगा कि पोषाहार वितरण के समय ग्रामीणों की जनसहभागिता के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहें। उन्होंने कहा कि हमें हर क्षेत्र में आदर्श आंगनबाड़ी केन्द्र बनाना चाहिए। साथ ही आंगनबाड़ी केन्द्र पर फल व सब्जी वाटिका को भी प्राथमिकता से तैयार करें इससे जैविक सब्जियां प्राप्त होंगी। इससे पौष्टिक आहार भी मिलेगा। राज्यपाल ने आंगनबाड़ी केन्द्र पर गुड़, चना भी वितरित करने का सुझाव सम्बन्धितों को दिया गया।

निदेशक बाल विकास एवं पुष्टाहार डा0 सारिका मोहन ने बताया कि वर्तमान में 18 जनपदों में महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पोषण वितरण का कार्य किया जा रहा है। प्रदेश के उन्नाव तथा फतेहपुर में पोषण निर्माण यूनिटों की स्थापना की जा चुकी है तथा उत्पादन शुरू हो गया है। अन्य जिलों में कार्य प्रगति पर है। श्री राधा मोहन ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में कुल 189204 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित है। जिसमें से 66 प्रतिशत केन्द्र में बिजली, 91.4 प्रतिशत केन्द्रों में स्वच्छ शौचालय तथा 95.6 प्रतिशत केन्द्रों में स्वच्छ पेयजल की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंन कहा कि अब आगनावाड़ी केन्द्रों पर फस्ट एण्ड बाक्स, दर्पण, वजन मापक यंत्र की सुविधा, साथ-साथ आंगनबाड़ी केन्द्र पर बाल पेंटिंग भी करायी जा रही है ताकि केंद्रों को वाराणसी के सेवापुरी माॅडल के अनुसार विकसित एवं सुसज्जित बनाया जा सके।

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