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केस दर्ज होने के बाद गुजरात भागा, मुंबई सहित दोनों राज्यों के 6 जिलों में काटी फरारी




जीतू सोनी की अचानक गिरफ्तारी के बाद अलग-अलग चर्चाएं भी गरम हैं। एक चर्चा यह भी है कि पुलिस से चौतरफा घिरने के बाद खुद उसने ही सरेंडर कर दिया है। वहीं एक जानकारी यह भी है कि पुलिस ने जीतू को उसी दिन हिरासत में ले लिया था जब भाई महेंद्र को अमरेली के फार्महाउस से गिरफ्तार किया था। हालांकि पुलिस अधिकारी इन खबरों से इनकार कर रहे हैं।
डीजीपी की मॉनिटरिंग, सीएम को रिपोर्टिंग
गिरफ्तारी को लेकर डीजीपी स्तर से मॉनिटरिंग की जा रही थी। इसलिए इंदौर के अफसर ज्यादा खुलकर जानकारी देने से बचते रहे हैं। यह बात भी सामने आई है कि सीएम को भी अफसर गिरफ्तारी की पल-पल की रिपोर्टिंग कर रहे थे। रास्ते में उसे लाने पर स्टॉपेज भी नहीं करवाया गया।
केस दर्ज होने के बाद गुजरात भागा था
जीतू से रविवार देर रात आईजी विवेक शर्मा ने पूछताछ की तो उसने कबूला की केस दर्ज होने के बाद वह सीधे गुजरात ही भागा था। बड़े भाई महेंद्र सोनी, हुकुम सोनी और बेटे व भतीजे को उसी ने फरारी कटवाई। गुजरात में हमारे परिवार व मिलने वालों का अच्छा होल्ड है, इसलिए इन सभी को मैंने ही वहां छिपाया था। अब चूंकि मैं आ गया हूं तो मेरे भाई, बेटा व भतीजे भी जल्द सरेंडर कर देंगे। मेरे भाई महेंद्र व हुकूम सोनी को कैंसर है। मैं ही उनके लिए मुख्य भूमिका में रहा हूं, लेकिन आर्थिक रूप से टूट चुका हूं।
रिश्तेदार और अन्य आरोपी हैं फरार
एएसपी दंडौतिया ने बताया कि जीतू के अमरेली से भागने के बाद से ही जीतू के हर रुट, हर ठिकाने और संपर्क में रहे हर शख्स को हमने ट्रैक कर लिया था। जीतू के खिलाफ थाना पलासिया, एमआईजी और तुकोगंज में 17 केस हैं। वर्ष 1991 से उसका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पलासिया थाने में दर्ज मानव तस्करी के केस में उसकी पहली गिरफ्तारी ली गई है। माफिया अभियान में दर्ज 47 प्रकरणों में उसकी गिरफ्तारी शेष है। भाई हुकुम सोनी, बेटे विक्की सोनी, भतीजे जिग्नेश व लक्की सोनी की तलाश जारी है।
अचानक गिरफ्तारी पर सवाल : कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा कि माफिया की गिरफ्तारी का पार्टी स्वागत करती है। हालांकि कोरोना काल में अचानक इन माफिया की गिरफ्तारी सवाल खड़े कर रही है। हमारी मांग है कि कमलनाथ सरकार के माफिया अभियान को शिवराज सरकार भी जारी रखे, क्योंकि भाजपा के कई नेताओं ने इस अभियान का विरोध किया था।
दोनों दलों के नेता बनाते थे दूरी
जीतू से कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के नेता दूरी बनाकर चलते थे। वजह दोस्त बनाकर धोखा करने की आदत थी। बहुत कम नेताओं से इसकी पटरी बैठी। कांग्रेस में महेश जोशी, पंकज संघवी, सत्यनारायण पटेल, प्रेमचंद गुड्‌डू तो भाजपा में तुलसी सिलावट सुदर्शन गुप्ता जैसे नेताओं से जीतू का छत्तीस का आंकड़ा रहा।

दो सबसे बड़े पीड़ित

सोने के बदले 21 दुकानें दीं, वह भी हड़प लीं, टैक्सी चला रहे अब
हमारा मुंबई में सोने-चांदी का कारोबार था। जीतू सोनी के साथ भी हम कुछ कामकाज करते थे। 1988 के आसपास उसने लाखों रुपए का सोना मंगवाया, पर उसका पेमेंट नहीं दिया। जब उससे पैसा मांगा तो उसने बदले में बड़वानी प्लाजा की 21 दुकानें दिलवा दीं। इन दुकानों पर कब्जा लेने गए तो जीतू ने धमकाया। उसने ये दुकानें भी हड़प लीं। अब वह सब काम बंद हो चुका है, मजबूरी में टैक्सी चला रहा हूं।
– राजीव थालेसर, मुंबई

बाउंसरों ने बंधक बनाया जीतू ने दुष्कर्म किया, पति ने बनाया वीडियो

10 अक्टूबर 2016 को मैं पति के साथ पंखिड़ा गरबा में परफॉर्मेंस देने आई थी। इस दौरान जीतू और मेरे पति होटल बेस्ट वेस्टर्न ले गए। वहां मेरे दोनों बच्चों को अलग कमरे में भेजा और फिर बाउंसरों ने बंधक बना दिया। धमकाकर मेरे साथ जीतू ने दुष्कर्म किया। इसका वीडियो पति ने बनाया। पति ने संबंध बनाए तो उसका वीडियो जीतू ने बनाया था। जब जीतू पर कार्रवाई हुई तो मैं इंदौर आई और तत्कालीन डीआईजी रुचिवर्धन मिश्र से मिलकर जीतू, पति और तीन बाउंसरों पर केस दर्ज कराया।
दुष्कर्म पीड़ित महिला

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जीतू सोनी

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