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औघड़ पीर श्री बीरनाथ जी महाराज हुए गोलोक वासी [Source: Dainik Bhaskar]



ब्रह्मलीन औघड़ पीर श्री बीरनाथ जी महाराज के संख्या ढाल कार्यक्रम गुरुवार को प्रात: वेदी पूजन से शुरू हुआ। 11 औघड़ ने बाबा बीरनाथ अघोरी की वेदी का पूजन किया एवं नाथ संप्रदाय की ओर से उन्होंने समपरण भाव दिया। एक बजे से अन्नधिवास, फलाधिवास, पुष्पाधिवास और श्यायधिवास का पूजन किया गया। चंद्र अघोर आश्रम में स्थापित गोरख पीठ में कर्मकांडी ब्राह्मणों एवं नाथपंथी अघोरियों ने स्थापित की जाने वाली शिव, गणेश एवं बाबा बीरनाथ की मूर्तियों का पहले अन्नाधिवास कराया।

इसमें मूर्तियों को पहले फल, पुष्प एवं गंगाजल में डुबोकर रखा जाता है। मान्यता हैै कि देवलोक में जाने वाले ब्रह्मलीन बाबा वीर नाथ जी को वहां सारी वस्तुएं सुुुलभ होंंगी। यह उनके प्रति संपूर्ण का प्रतीक है जिसेेे नाथपंथी संप्रदाय मेंं सभी के लिए निभाया जाता है। 12 केे योगी श्री कृष्ण नाथ जी महाराज एवं श्री पीर तिल आदि श्री पारसनाथ जी महाराज द्वारा संपन्न कराया गया।

कार्यक्रम में बिहार सरकार के भवन निर्माण एवं शिक्षा मंत्री डॉ. आलोक चौधरी, बिहार विधानसभा परिषद सदस्य नीरज कुमार, जहानाबाद के सांसद चंद्रेश्वर चंद्रवंशी समेत दर्जनों गणमान्य लोग शामिल हुए। शाम 7 बजे से संख्या ढाल कार्यक्रम शुरू हुआ। संख्या ढाल का अर्थ ही सामान्य भाषा में बरखी रसम है। एक साल पूर्व देह त्याग करने वाले अघोरी बाबा वीर नाथ जी महाराज को 100 शरीर समाधि दे दी गई थी, तब से उनकी आत्मा भूलोक पर ही थी।

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300 से अधिक नाथपंथी औघड़ पीर व 100 औघड़ संख्या ढाल में शामिल।

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