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ओम बिड़ला ने कहा- संवाद में सहमति-असहमति ही हमारे लोकतंत्र की पहचान [Source: Dainik Bhaskar]



दुनिया के अंदर भारत का लोकतंत्र सबसे मजबूत और सशक्त है। इसका कारण हमारा मूल संविधान है। जिसमें जनता के मूल अधिकार और मूल दायित्व दिए गए हैं। संविधान ही हमारा मार्गदर्शन करता है और लोकतंत्र को सशक्त बनाने का काम करता है। संसद में वाद-विवाद होता है, चर्चा होती है। सदस्यों की आपस में सहमति और असहमति होती है। यहीं सहमति और असहमति हमारे लोकतंत्र की पहचान है। यह बात लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कही। वह गुरुवार को राष्ट्रीय यूथ संसद-2021 के दूसरे दिन के कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित कर रहे थे।

नेशनल यूथ पार्लियामेंट आर्गेनाइजेशन (एनवायपीओ) ने राष्ट्रीय युवा संसद-2021 का तीन दिवसीय कार्यक्रम बुधवार से शुरू किया है। इसमें संसद के सदस्यों के रूप में अलग-अलग राज्यों/केन्द्र शासित राज्यों के पांच-पांच कॉलेजों के 150 छात्रों का चयन किया गया है। इनमें ही प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री से लेकर विपक्ष के नेता बनाएं गए है। यह छात्र अलग-अलग राज्यों से डिजिटल माध्यम से जुड़कर बजट सत्र में चर्चा कर रहे हैं।

गुरुवार को छात्रों ने 15 मंत्रालयों का बजट प्रस्ताव पेश किया गया। शुक्रवार को भी बाकी मंत्रालय का बजट पेश होगा। इसके बाद युवा वित्त मंत्री बजट पेश करेंगे। इसके बाद मांग और अनुदान को पास किया जाएगा। एनवायपीओ के संस्थापक कार्तिकेय गोयल ने बताया कि इसका उद्देश्य युवाओं को देश की वित्त व्यवस्था से जोड़ना और उसका अनुभव प्रदान करना है। वहीं, एनवायपीओ के सचिव रोहन महाजन ने कहा कि कोरोना काल में यह भी संदेश दिया जा रहा कि कि संसद डिजिटल माध्यम से भी चल सकती है।

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लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला गुरुवार को राष्ट्रीय यूथ संसद-2021 के दूसरे दिन के कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित कर रहे थे।- फाइल फोटो।

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