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एसएफसी के कांड्रा गोदाम में अनाज के हेरफेर पर एजीएम, डीएसओ पर कार्रवाई संभव, छापेमारी में 632 बोरी चावल स्टॉक में कम पाया गया [Source: Dainik Bhaskar]



कांड्रा एसएफसी गड़बड़ी प्रकरण में गाेदाम के महाप्रबंधक और सह महाप्रबंधक पर कार्रवाई हाे सकती है। एडीएम लाॅ एंड ऑर्डर चंदन कुमार का कहना है कि जब्त रजिस्टर की जांच की जा रही है। एसएफसी गाेदाम कांड्रा से अनाज की डिलीवरी का रजिस्टर मेंटेन नहीं किया जा रहा था, जबकि एसएफसी नियमावली के तहत गाेदाम में आवक और अनाज डिलीवरी की रजिस्टर की नियमित इंट्री अनिवार्य है। एसएफसी एजीएम जयदेव गिरि का कहना है कि आपूर्ति विभाग के तरफ से रजिस्टर नहीं दिया जा रहा है। इस कारण सादे कागज पर आवक और डिलीवरी मेंटेन किया जा रहा है। एसएफसी नियमावली के तहत जिला आपूर्ति पदाधिकारी (डीएसओ) एसएफसी गाेदाम के जीएम हाेते हैं।

रजिस्टर मेंटेन नहीं हाेने काे लेकर अगर एजीएम दाेषी हैं ताे उसके लिए जीएम भी उतने ही जिम्मेवार हैं। दाेनाें कार्रवाई के जद में आ सकते हैं। बताते चलें कि कांड्रा खाद्य गोदाम में गड़बड़ी की सूचना पर सोमवार को एडीएम लाॅ एंड ऑर्डर चंदन कुमार के नेतृत्व में छापेमारी की गई थी, जिसमें 632 बोरी चावल स्टॉक में कम पाया गया था। इसके बाद एडीएम रजिस्टर व कागजात जब्त कर साथ ले गए थे। हालांकि छापेमारी के बाद मंगलवार को गोदाम से चावल और गेहूं की आपूर्ति पीडीएस की दुकानों में जारी रही।

जनसेवक को बना दिया एसएफसी गोदाम का एजीएम, इसकी भी जांच शुरू की गई

एडीएम लाॅ एंड ऑर्डर का कहना है कि कांड्रा एसएफसी गाेदाम में एजीएम की नियुक्ति नियमसंगत है कि नहीं, उसकी भी जांच की जा रही है। जांच के क्रम में जानकारी मिल रही है कि जनसेवक (वीएलडब्ल्यू) काे एसएफसी गाेदाम के एजीएम का प्रभार दे दिया गया है। इतने बड़े पद का प्रभार कैसे और क्याें दिया गया है, यह जांच का विषय है, जबकि जनसेवक का पद लिपिक से भी नीचे का हाेता है। पूछने पर जिला आपूर्ति विभाग का कहना है कि एजीएम रैंक के अधिकारी की पाेस्टिंग दाे साल से नहीं हुई है। इस कारण जनसेवक काे ही एसएफसी गाेदाम के एजीएम का प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है।

वार्ड 35 से 49 तक कांड्रा गाेदाम से जाता है अनाज

स्टेट फूड कॉरपोरेशन में धनबाद के बरवाअड्डा और बरमसिया से पीडीएस की खाद्य सामग्रियां भेजी जाती हैं। कांड्रा गोदाम में वार्ड नंबर 35 का कुछ हिस्सा से लेकर वार्ड 49 तक की खाद्य सामग्री की आपूर्ति होती है। इस गोदाम में खाद्य सामग्री लाने और डीपीएस के दुकानदारों तक पहुंचाने का जिम्मेवारी ट्रांसपोर्टर की भी है।

इधर, मां अंबे पीडीएस में गड़बड़ी के मामले में आज साैंपी जाएगी रिपाेर्ट

जिला आपूर्ति विभाग में गड़बड़ी मामले की रिपाेर्ट बुधवार काे साैंपी जा सकती है। एडीएम सप्लाई संदीप कुमार दाेराईबुरु का कहना है कि मार्केंटिंग ऑफिसर द्वारा रिपाेर्ट तैयार की जा रही है। संबंधित क्षेत्र के एमओ ने जाे जानकारी दी है, उसके अनुसार मां अंबे स्वयं सहायता समूह जनवितरण प्रणाली की दुकान काे 2013 में पीडीएस अनाज के वितरण का लाइसेंस मिला था, जबकि मां अंबे आटा चक्की का लाइसेंस 2017 में मिला है। अगर दाेनाें दुकान एक ही व्यक्ति के नाम पर हैं ताे पीडीएस डीलरशिप का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। इसके पहले पीडीएस डीलर काे शाेकाॅज कर लिखित में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

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Action possible on AGM, DSO on manipulation of grain in SFC’s Kandra godown

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