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आखिर क्यों जब्त हुई गायत्री प्रजापति की 55 करोड़ की सम्पत्ति, …तो क्या अब कंगाल हो गया यूपी का यह पूर्व मंत्री [Source: Patrika : India’s Leading Hindi News Portal]

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति (Gayatri Prajapati) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पहला आरोपपत्र दाखिल किया, तो उसकी अकूत संपत्तियों का पूरा काला चिट्ठा खुलकर सामने आ गया। ईडी (ED) के अधिकारियों ने बताया कि प्रजापति और उनके परिवार के सदस्यों की 60 संपत्तियों और 50 से ज्यादा बैंक खातों के खिलाफ जब्ती की कार्रवाई की गई है। जब्त की गयी संपत्तियाों का बाजार मूल्य आज के समय में 55 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। दरअसल अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान खनन विभाग का प्रभार संभालने वाले गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ ईडी कथित तौर पर आय से अधिक की संपत्ति के आरोपों की जांच कर रहा है। ईडी के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि अब तक कुल 57 बैंक खातों में 3.5 करोड़ रुपये और 33.45 करोड़ रुपये की 60 अचल संपत्तियां जब्त की गयी है। इन संपत्तियों का बाजार मूल्य आज के समय में 55 करोड़ रुपये से ज्यादा है। ऐसे में बड़ा सवाल ये खड़ा हो रहा है कि ईडी की इस कार्रवाई के बाद क्या पूर्व मंत्री पूरी तरह से कंगाल हो चुका है।

 

ईडी ने जब्त की करोड़ों की संपत्तियां

आपको बता दें कि पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति अभी रेप के मामले में जेल में बंद हैं। साथ ही खनन के पट्टों के आवंटन मे धांधली के आरोप में उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई की जांच भी चल रही है। इस जांच के सिलसिले में गायत्री प्रजापति और उनके करीबियों पर कई बार छापेमारी हो चुकी है। खनन घोटाले को लेकर बीते दिनों अपनी जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने गायत्री प्रजापति करीब सात ठिकानों पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान ईडी को सबसे अधिक बेनामी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले थे। छापेमारी मे जो दस्तावेज मिले, उनसे एक बात साफ हुई कि प्रजापति की छह से ज्यादा शहरों में संपत्तियां हैं और सारी संपत्ति खनन की कमाई से बनाई गई थी। ईडी की छापामारी में पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति और उनके परिवार के नाम से लखनऊ, अमेठी, सुल्तानपुर, कानपुर, सीतापुर, रायबरेली और मुंबई में करीब 38 करोड़ रुपये की संपत्तियां सामने आईं। इनमें कई संपत्तियां बेनामी भी हैं। इन सभी संपत्तियों की आज की कीमत करीब 55 करोड़ रुपये आंकी जा ही है।

 

सात ठिकानों पर छापा

ईडी ने गायत्री के लखनऊ, अमेठी और कानपुर के सात ठिकानों पर छापा मारा था। ईडी के अफसरों के मुताबिक छापेमारी के दौरान 100 से अधिक रजिस्ट्रियां बरामद हुई हैं। जबकि 80 संपत्तियों की जानकारी दी गई थी। इनमें 44 बेनामी हैं। बाकी की संपत्तियां गायत्री के परिवार के सदस्यों और उसकी कंपनियों के नाम से हैं। सिर्फ मुंबई में ही परिवार के सदस्यों के नाम से चार विला हैं। हर विला की कीमत ढाई करोड़ रुपये बताई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक बेनामी संपत्तियां जिनके नाम पर हैं, उन्हें चिह्नित कर पूछताछ की जाएगी।

 

जानें पूरा मामला

दरअसल गायत्री प्रजापति अखिलेश यादव की नेतृत्व वाली समाजवादी सरकार में खनन मंत्री थे, लेकिन राज्य में बीजेपी सरकार आने के बाद अवैध खनन का मामला जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को सौंपा गया। प्रजापति पर आरोप था कि साल 2012 से 2016 के दौरान फतेहपुर जिले में खनन के लाइसेंस सरकारी अधिकारियों और प्राइवेट लोगों से मिल कर बिना किसी तय मानक और ई-टेंडरिग के जारी कर दिए गए। इससे सरकार को नुकसान हुआ और गायत्री प्रजापति ने अवैध संपत्तियां बनाई। इसी के बाद ईडी ने मनी लॉड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। जांच में ईडी ने पाया कि 2012 से 2016 के दौरान मंत्री रहते हुए गायत्री प्रजापति की संपति में काफी इजाफा हुआ है। जिसके बाद अब ईडी ने प्रजापति की सारी संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू की।

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